अंतरिक्ष तकनीक की दुनिया में चीन ने एक और बड़ा धमाका किया है। चीन ने लॉन्ग मार्च-10A रॉकेट के पहले स्टेज को समुद्र में एक विशाल नेट (जाल) के जरिए सफलतापूर्वक रिकवर कर लिया है। ऑर्बिटल रॉकेट के बूस्टर को इस तरह कैप्चर करने का यह दुनिया का पहला सफल परीक्षण है।
क्या है चीन का नया नेट प्रयोग? आमतौर पर स्पेसएक्स जैसी कंपनियां अपने रॉकेट बूस्टर को ड्रोन शिप पर वर्टिकल लैंडिंग करवाती हैं। लेकिन चीन ने एक अलग रास्ता चुना है। हैनान कमर्शियल स्पेस लॉन्च साइट से उड़ान भरने के बाद, रॉकेट का बूस्टर समुद्र में बने एक प्लेटफॉर्म पर लगे नेट में फंसकर सुरक्षित उतर गया। यह तकनीक रॉकेट को होने वाले नुकसान को कम करती है और रिकवरी को आसान बनाती है।
लागत कम करने की बड़ी रणनीति रीयूजेबल रॉकेट का सीधा सा मतलब है—लागत में भारी कटौती। हर बार नया बूस्टर बनाने के बजाय उसे दोबारा इस्तेमाल करना किफायती होता है। चीन का यह कदम भविष्य में सैटेलाइट लॉन्च, स्पेस स्टेशन निर्माण और अन्य अंतरिक्ष अभियानों को बेहद सस्ता और सुलभ बना देगा।
चांद पर मानव मिशन की बिछी राह लॉन्ग मार्च-10 रॉकेट परिवार को विशेष रूप से चंद्रमा पर मानव भेजने के मिशन के लिए तैयार किया जा रहा है। इस सफल रिकवरी ने चीन के मून मिशन की राह आसान कर दी है। अब चीन उन देशों की सूची में मजबूती से खड़ा हो गया है जो कम कीमत पर अंतरिक्ष की गहराइयों तक पहुंचने का लक्ष्य रखते हैं।
स्पेस रेस में चीन की दहाड़ समुद्र में नेट के जरिए रॉकेट को पकड़ना कोई आसान काम नहीं था। इसके लिए रॉकेट की सटीक लैंडिंग, समुद्र की लहरों और हवा की गति का सटीक आकलन जरूरी था। इस उपलब्धि के साथ ही चीन ने यह साबित कर दिया है कि वह स्पेस टेक्नोलॉजी में अमेरिका जैसी महाशक्तियों को कड़ी टक्कर देने के लिए पूरी तरह तैयार है।
आने वाले वर्षों में, रीयूजेबल टेक्नोलॉजी के दम पर चीन अपने अंतरिक्ष कार्यक्रमों की संख्या में तेजी ला सकता है, जो ग्लोबल स्पेस इकोनॉमी के लिए एक बड़ा बदलाव साबित होगा।
अमेरिका जिसको लेकर इतरा रहा था उस दिशा में चीन ने भी बड़ा क़दम बढ़ा दिया है!
— Umashankar Singh उमाशंकर सिंह (@umashankarsingh) July 10, 2026
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