खालिस्तान पर न्यूजीलैंड का कड़ा रुख: क्या कनाडा, अमेरिका और ब्रिटेन अब लेंगे सबक?
News Image

खालिस्तान के मुद्दे पर भारत का रुख हमेशा से स्पष्ट रहा है: अभिव्यक्ति की आजादी और अलगाववाद के नाम पर हिंसा फैलाने के बीच एक स्पष्ट रेखा होनी चाहिए। लंबे समय के बाद, न्यूजीलैंड ने इस दिशा में एक परिपक्व और संतुलित रुख अपनाकर दुनिया के सामने मिसाल पेश की है।

न्यूजीलैंड का दो टूक संदेश न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने एक साक्षात्कार में साफ कर दिया कि उनके देश में अभिव्यक्ति की आजादी का सम्मान तो है, लेकिन हिंसा और डराने-धमकाने वाली गतिविधियों के लिए कोई जगह नहीं है। लक्सन ने स्पष्ट किया कि न्यूजीलैंड की पुलिस ऐसी किसी भी हरकत पर कड़ी नजर रखती है और कानून के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

भारत-न्यूजीलैंड संबंधों पर असर नहीं जब उनसे पूछा गया कि क्या खालिस्तान का मुद्दा भारत और न्यूजीलैंड के रिश्तों में बाधा बनेगा, तो लक्सन ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने न केवल भारत की सुरक्षा चिंताओं को सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया, बल्कि यह भी माना कि खालिस्तान के मुद्दे ने भारत को भारी पीड़ा और नुकसान पहुंचाया है।

कनाडा के लिए आईना न्यूजीलैंड का यह रुख उन देशों के लिए एक बड़ा सबक है जो अभिव्यक्ति की आजादी की आड़ में भारत विरोधी ताकतों को संरक्षण देते रहे हैं। विशेष रूप से कनाडा, जहां पिछले कुछ वर्षों में भारत विरोधी गतिविधियों, दूतावासों के सामने प्रदर्शन और कट्टरपंथ को खुला समर्थन मिलता रहा है। कनाडा ने अक्सर अपनी राजनीति के चलते अलगाववादियों को खुली छूट दी है, जिससे भारत के साथ उसके संबंध ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गए थे।

अमेरिका और ब्रिटेन को भी बदलना होगा नज़रिया केवल कनाडा ही नहीं, बल्कि अमेरिका और ब्रिटेन में भी भारतीय मंदिरों पर हमले, महात्मा गांधी की मूर्तियों के साथ तोड़फोड़ और भारतीय दूतावासों के सामने भारत विरोधी प्रदर्शन आम होते गए हैं। इन देशों ने अक्सर इन्हें फ्री स्पीच का नाम देकर पल्ला झाड़ लिया। भारत ने बार-बार आगाह किया है कि जब अभिव्यक्ति हिंसा और अलगाववाद को बढ़ावा देती है, तो वह लोकतांत्रिक अधिकार नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन जाती है।

लोकतंत्र का सही अर्थ न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री का बयान कूटनीतिक शिष्टाचार से कहीं अधिक है। यह एक संदेश है कि लोकतंत्र में अधिकारों की रक्षा के साथ-साथ कानून-व्यवस्था की स्थापना समान रूप से महत्वपूर्ण है। यदि कनाडा, अमेरिका और ब्रिटेन वास्तव में भारत के साथ अपने संबंधों को और मजबूत करना चाहते हैं, तो उन्हें न्यूजीलैंड के इस संतुलित दृष्टिकोण को अपनाना ही होगा। अब समय आ गया है कि ये देश अलगाववादी एजेंडे को लोकतांत्रिक अधिकार का जामा पहनाना बंद करें।

कुछ अन्य वेब स्टोरीज

Story 1

क्या आपके पास अभी भी पड़ा है 2000 का नोट? RBI ने बताया कैश पाने का आसान तरीका

Story 1

गगनयान मिशन: अंतरिक्ष से सुरक्षित वापसी का रास्ता साफ, ISRO ने पास की सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा

Story 1

होर्मुज बंद किया तो ईरान का नामो-निशान मिटा देंगे, जेडी वेंस की दो टूक चेतावनी

Story 1

द ओडिसी के भारतीय अवतार: आमिर खान से जान्हवी कपूर तक, AI ने बदली सितारों की दुनिया

Story 1

सतलुज फिल्म विवाद: IMDb से रेटिंग गायब होते ही भड़के निर्देशक संजय गुप्ता

Story 1

बारिश में भीगते हुए दोस्तों की चीयर्स वाली मस्ती, मुंबई का ये वीडियो देख आप भी कहेंगे- क्या लाइफ है!

Story 1

मेलबर्न में गूंजा मां तुझे सलाम : PM मोदी का जोरदार स्वागत, ऑस्ट्रेलिया के साथ मजबूत हुए सांस्कृतिक रिश्ते

Story 1

शूटिंग के दौरान अभिनेता राजेश शर्मा को जहरीले कीड़े ने काटा, हालत गंभीर; एसोसिएशन ने मांगी हाई-लेवल जांच

Story 1

अमेरिका-ईरान में बढ़ा तनाव: ट्रंप की मिसाइलें और तेहरान का फर्जी पलटवार

Story 1

मैंने 8 युद्ध रोके, भारत-पाकिस्तान के बीच परमाणु महाविनाश टाला : ट्रंप ने फिर ठोका नोबेल पुरस्कार पर दावा