ईरान का गोल्डन वेपन : परमाणु कार्यक्रम से भी बड़ी प्राथमिकता बना होर्मुज जलडमरूमध्य
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तेहरान की बदली रणनीति ईरान ने अब अपनी सामरिक प्राथमिकताएं पूरी तरह बदल दी हैं। दशकों तक अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध झेलने के बाद भी ईरान के लिए उसका परमाणु कार्यक्रम (Nuclear Program) अब पहली पसंद नहीं रहा। इसके बजाय, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) पर नियंत्रण ईरान का सबसे शक्तिशाली गोल्डन वेपन बन चुका है। ईरान अब इसे अमेरिका के साथ सौदेबाजी का मुख्य कार्ड मान रहा है।

हमलों से बढ़ रहा तनाव हाल ही में ईरान ने बिना किसी चेतावनी के होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर फायरिंग की है, जिससे अमेरिका के साथ हुई हालिया अंतरिम शांति डील खतरे में पड़ गई है। पेंटागन ने आधिकारिक तौर पर ईरान के ठिकानों पर बड़े पैमाने पर जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी है, जिसमें पिछले 24 घंटों में 170 से अधिक ईरानी ठिकानों को अमेरिकी बलों ने निशाना बनाया है।

नहीं छोड़ेंगे नियंत्रण ईरानी नेतृत्व का मानना है कि जो देश होर्मुज जैसे रणनीतिक मार्ग पर नियंत्रण रखता है, वही वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की दिशा तय करता है। तेहरान के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, शीर्ष नेतृत्व में इस बात पर आम सहमति है कि कोई भी समझदार देश अपना इतना महत्वपूर्ण लेवरेज पॉइंट कभी नहीं छोड़ेगा। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वे होर्मुज पर किसी भी बाहरी दबाव को समर्पण मानते हैं और इसे किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ेंगे।

इंटरिम डील और अनसुलझे सवाल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ हुई हालिया अंतरिम डील में होर्मुज से जहाजों के सुरक्षित आवागमन पर अस्पष्टता बनी हुई है। मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग में ईरान को 60 दिनों तक जहाजों को न रोकने की बात कही गई है, जिसे तेहरान अपने प्रबंधन अधिकार की मान्यता मान रहा है, जबकि अमेरिका इसे केवल एक अस्थायी सुविधा मानता है। यह विरोधाभास किसी भी समय युद्ध को फिर से भड़का सकता है।

परमाणु मुद्दे को किनारे किया ईरान ने अब स्पष्ट कर दिया है कि वह परमाणु कार्यक्रम पर तब तक कोई चर्चा नहीं करेगा जब तक अमेरिका स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के प्रबंधन पर ईरान के अधिकारों को पूरी तरह स्वीकार नहीं कर लेता। पिछले 25 वर्षों से ईरान और अमेरिका के बीच तनाव का केंद्र रहा परमाणु मुद्दा अब पीछे छूट गया है। तेहरान की नजर में, होर्मुज पर नियंत्रण ही वह चाबी है जिससे वह वाशिंगटन को घुटनों पर ला सकता है।

भविष्य का जोखिम जानकारों का मानना है कि दोनों पक्ष इस भ्रम में हैं कि वे जीत रहे हैं। ईरान को लगता है कि होर्मुज को हथियार बनाकर वह अपनी शर्तें मनवा सकता है, जबकि अमेरिका उसे सैन्य शक्ति से दबाने की कोशिश कर रहा है। यह टकराव न केवल वैश्विक तेल बाजार को अस्थिर कर रहा है, बल्कि क्षेत्र को एक बड़े और लंबे युद्ध के मुहाने पर लाकर खड़ा कर चुका है।

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