विंबलडन में अर्नव पापरकर का ऐतिहासिक धमाका: 36 साल बाद तोड़ा लिएंडर पेस जैसा सूखा
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लंदन: भारतीय टेनिस के उभरते सितारे अर्नव पापरकर ने विंबलडन 2026 में इतिहास रच दिया है। 18 वर्षीय इस खिलाड़ी ने बॉयज सिंगल्स के क्वार्टर फाइनल में प्रवेश कर पूरे देश का गौरव बढ़ाया है। अर्नव का यह प्रदर्शन भारतीय टेनिस के लिए एक नई उम्मीद की किरण बनकर उभरा है।

52 मिनट में जापान को किया पस्त राउंड ऑफ 16 के मुकाबले में अर्नव का सामना जापान के रियो तबाता से था। पुणे के इस 6 फीट 1 इंच लंबे खिलाड़ी ने कोर्ट पर अपना दबदबा बनाए रखा और महज 52 मिनट में रियो को सीधे सेटों में 6-2, 6-1 से धूल चटा दी। अर्नव ने मैच में 8 एस (aces) लगाए और अपनी पहली सर्विस पर 92% अंक हासिल किए। उनकी सर्विस की गति 208 किमी/घंटा तक पहुंची, जिसने प्रतिद्वंद्वी को कोई मौका नहीं दिया।

36 साल पुराना रिकॉर्ड टूटा इस जीत के साथ ही अर्नव 1990 के बाद जूनियर विंबलडन के क्वार्टर फाइनल में पहुंचने वाले पहले भारतीय पुरुष खिलाड़ी बन गए हैं। उनसे पहले यह कारनामा महान टेनिस खिलाड़ी लिएंडर पेस ने किया था, जो उस साल चैंपियन बने थे। इतना ही नहीं, वह 2009 में यूकी भांबरी के बाद किसी भी जूनियर ग्रैंड स्लैम के अंतिम-8 में पहुंचने वाले पहले भारतीय बन गए हैं।

पुरानी हार का लिया बदला अर्नव के लिए यह जीत मानसिक रूप से भी बड़ी है। रियो तबाता के खिलाफ पिछली हार उनके दिमाग में थी, जहाँ वे मैच पॉइंट होने के बावजूद हार गए थे। जीत के बाद अर्नव ने कहा, वह मैच मेरे दिमाग में था, लेकिन मैं अब मानसिक रूप से काफी शांत हो गया हूं। मैंने खुद को याद दिलाया कि यह सिर्फ एक खेल है।

अब अमेरिका से होगी टक्कर टूर्नामेंट में अब तक एक भी सेट न गंवाने वाले अर्नव की राह अब और कठिन होने वाली है। क्वार्टर फाइनल में उनका सामना अमेरिका के क्वालीफायर जॉर्डन ली से होगा। पूरा देश अब उन्हें रामनाथन कृष्णन, रमेश कृष्णन और लिएंडर पेस की ऐतिहासिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए विंबलडन ट्रॉफी के करीब देख रहा है। उनकी ट्रेनिंग पुणे में हेमंत बेंद्रे और स्पेन की सोटो एकेडमी में निगेल बीवर्स की देखरेख में चल रही है।

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