तू चोर तो तू चोर... सायोनी घोष नहीं, अब ममता की इस बुलेट वाली लड़की से हिलेगा बंगाल!
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बरूईपुर कांड: सड़कों पर मचा बवाल पश्चिम बंगाल की राजनीति इस समय बेहद आक्रामक दौर से गुजर रही है। बरूईपुर में नाबालिग से रेप और मर्डर के खिलाफ न्याय की मांग को लेकर तृणमूल कांग्रेस ने कोलकाता में मार्च निकाला था। लेकिन यह रैली एक बड़े राजनीतिक घमासान का अखाड़ा बन गई। इस दौरान टीएमसी की नवनियुक्त आईटी सेल प्रमुख उपासना चौधरी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहा है।

बुलेट वाली लड़की और सरेआम बदसलूकी वीडियो में दिख रहा है कि उपासना बुलेट बाइक पर सवार हैं, जिन्हें चारों तरफ से प्रदर्शनकारियों ने घेर रखा है। उन पर चोर तो तू चोर के नारे लगाए जा रहे हैं। भीड़ के बीच उपासना डटकर मुकाबला कर रही थीं, लेकिन भारी विरोध और धक्का-मुक्की के बीच अंततः उनकी बुलेट गिर गई। उन्हें और उनके साथियों को पुलिस की मौजूदगी में दौड़ा-दौड़ा कर पीटा गया और उनके हैंड-माइक छीनकर तोड़ दिए गए।

हाई कोर्ट के आदेशों की खुली धज्जियां यह शर्मनाक घटना तब हुई जब टीएमसी ने कलकत्ता हाई कोर्ट से शांतिपूर्ण मार्च निकालने की औपचारिक अनुमति ली थी। कोर्ट के स्पष्ट निर्देश थे कि प्रदर्शनकारियों को हैंड-माइक इस्तेमाल करने की आजादी होगी। इसके बावजूद, सड़क पर उतरी भीड़ ने सुरक्षा घेरे को तोड़ दिया और पुलिस मूकदर्शक बनी खड़ी रही। इस घटना ने बंगाल की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

ममता की नई फायरब्रांड योद्धा सायोनी घोष के बागी तेवरों के बीच, ममता बनर्जी को उपासना चौधरी के रूप में एक नया और आक्रामक चेहरा मिल गया है। हमले की खबर मिलते ही ममता बनर्जी खुद ग्राउंड जीरो पर पहुंचीं और सुरक्षा घेरा तोड़कर उपासना को बचाया। मुख्यमंत्री ने प्रशासन पर विपक्षी कैडरों की तरह काम करने का आरोप लगाते हुए इसे अदालत की अवमानना बताया है।

बैकफुट पर सुवेंदु अधिकारी? राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस हमले ने सुवेंदु अधिकारी और बीजेपी खेमे को बैकफुट पर ला दिया है। एक महिला नेता पर पुलिस के सामने हुए इस बर्बर हमले से जनता के बीच टीएमसी को सहानुभूति मिल रही है। उपासना चौधरी का बिना डरे सामना करना कार्यकर्ताओं में नया जोश भर रहा है।

क्या सुरक्षित है बंगाल? उपासना चौधरी पर हुआ हमला सिर्फ एक राजनीतिक झड़प नहीं है, बल्कि यह एक बड़ा सवाल है: क्या अब लोकतांत्रिक देश में इंसाफ के लिए शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना भी अपराध है? अगर हाई कोर्ट की अनुमति के बाद भी एक महिला राजनेता सुरक्षित नहीं है, तो आम महिलाओं की सुरक्षा का क्या? यह खेला अब बंगाल की राजनीति को और अधिक हिंसक दिशा में ले जा रहा है।

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