बलूचिस्तान में BLA का खूनी तांडव: शहीद जवानों को नसीब नहीं हुआ सम्मान, टेम्पो में ढोए गए शव
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जियारत: पाकिस्तान के अशांत बलूचिस्तान प्रांत में बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) द्वारा किए गए भीषण हमलों ने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। इन हमलों में मारे गए सुरक्षाकर्मियों की संख्या अब 42 तक पहुंच गई है, जिससे पूरे क्षेत्र में हड़कंप मचा हुआ है।

42 जवानों की शहादत, सिस्टम की शर्मनाक तस्वीर पाकिस्तान की सेना द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इस हफ्ते की शुरुआत में हुए अलग-अलग हमलों में 18 पुलिसकर्मियों और 11 सैनिकों की मौत हुई थी। जियारत जिले में एक पुलिस चौकी पर हमले के दौरान 18 पुलिसकर्मियों को अगवा कर लिया गया था, जिनके शव मिलने के बाद मौतों का आंकड़ा 42 हो गया है।

अमानवीय व्यवहार: ताबूतों का जुलूस इस घटना का सबसे दुखद पहलू वह है जिसे देखकर पूरी दुनिया हैरान है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें शहीद पुलिसकर्मियों के शवों को सम्मानजनक तरीके से ले जाने के बजाय एक खुले टेम्पो में ठूंसकर ले जाया जा रहा है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि टेम्पो की छत पर एक के ऊपर एक ताबूतों को रखा गया है।

स्थानीय लोगों का फूटा गुस्सा इस वीडियो को स्थानीय लोगों ने ताबूतों का जुलूस करार दिया है। सेना और सरकार की इस संवेदनहीनता पर सवाल उठाते हुए लोगों ने इसे जवानों का अपमान बताया है। एक तरफ पाकिस्तान सरकार खुद को सुरक्षा का बड़ा दावेदार बताती है, वहीं दूसरी तरफ अपने ही जवानों को बुनियादी सम्मान तक देने में नाकाम रही है।

BLA का खौफ और सरकार का वही पुराना राग पाकिस्तान ने इस हमले के लिए प्रतिबंधित संगठन BLA को जिम्मेदार ठहराया है। हमेशा की तरह, पाकिस्तानी हुक्मरान इस हमले के पीछे भी बाहरी ताकतों के हाथ होने का आरोप लगा रहे हैं। हालांकि, बलूचिस्तान में हिंसा की बढ़ती घटनाओं ने पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

इतिहास गवाह जियारत की बदहाली कभी अपने प्राचीन जुनिपर (देवदार) के जंगलों के लिए मशहूर जियारत शहर आज लाशों के ढेर में तब्दील हो चुका है। सदियों से खड़े ये पेड़ अब बलूचिस्तान के इस खून-खराबे और प्रशासनिक नाकामी के मूक गवाह बने हुए हैं। फिलहाल, इलाके में तनाव बरकरार है और सरकार की दलीलें जनता के आक्रोश को शांत करने में विफल साबित हो रही हैं।

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