अमेरिका-ईरान में सीधी जंग: 80 ठिकानों पर अमेरिकी बमबारी के बाद ईरान का 85 ठिकानों पर मिसाइल प्रहार
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मिडिल ईस्ट से इस वक्त की सबसे बड़ी और खौफनाक खबर सामने आ रही है। अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से सुलग रही चिंगारी अब एक पूर्ण सैन्य टकराव में बदल चुकी है, जिसने पूरी दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध की दहलीज़ पर खड़ा कर दिया है।

80 से ज्यादा ठिकानों पर अमेरिकी वायुसेना का तांडव

यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के आदेश पर अमेरिकी वायुसेना और नौसेना ने मंगलवार तड़के ईरान के भीतर 80 से ज्यादा सैन्य ठिकानों पर भीषण बमबारी की। इस हमले में ईरान का एयर डिफेंस सिस्टम, कमांड एंड कंट्रोल नेटवर्क और तटीय रडार साइटें ध्वस्त हो गई हैं। इतना ही नहीं, अमेरिकी सेना ने IRGC की 60 से ज्यादा लड़ाकू नावों को भी निशाना बनाया है, ताकि समुद्री रास्तों पर ईरान की पकड़ कमजोर की जा सके।

होर्मुज जलडमरूमध्य: समझौते का उल्लंघन और जंग की शुरुआत

इस महायुद्ध की नींव इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग के उल्लंघन से पड़ी। समझौते के तहत ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले नागरिक जहाजों को सुरक्षा देनी थी। लेकिन, ईरान पर तीन कमर्शियल जहाजों पर हमला करने का आरोप है। अमेरिका ने इसे वैश्विक व्यापार और अपनी संप्रभुता पर हमला माना और जवाबी कार्रवाई में सीधे ईरानी सैन्य ढांचे को निशाना बनाया।

ईरान का ‘ऑपरेशन 85’: अमेरिकी फिफ्थ फ्लीट पर भीषण मिसाइल हमला

अमेरिकी हमले के जवाब में ईरान भी पीछे नहीं हटा। तेहरान ने बहरीन स्थित अमेरिकी नौसेना के ‘फिफ्थ फ्लीट’ मुख्यालय और कुवैत के ‘अली अल-सलेम’ एयर बेस समेत कुल 85 अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमला कर दिया है। इस हमले के बाद बहरीन से लेकर कुवैत तक युद्ध के सायरन गूंज उठे हैं और अमेरिकी सैनिक बंकरों में छिपने को मजबूर हो गए हैं।

आसमान में बिखरा अमेरिकी गौरव, गिरा MQ-9 रीपर ड्रोन

तनाव का आलम यह है कि ईरान ने बुशहर प्रांत के पास अमेरिका के अत्याधुनिक ‘MQ-9 रीपर’ ड्रोन को मार गिराने का दावा किया है। ड्रोन का मलबा ईरानी सीमा में गिरने से अमेरिकी खुफिया तंत्र में खलबली मची हुई है। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में अब वही नियम चलेंगे जो तेहरान तय करेगा।

श्मशान जैसी शांति के बीच हमला, ईरान का गंभीर आरोप

ईरान ने इस हमले को लेकर एक गंभीर आरोप लगाया है। IRGC का दावा है कि अमेरिका ने यह हमला ठीक उस वक्त किया, जब ईरान में पूर्व सुप्रीम लीडर के अंतिम संस्कार की रस्में चल रही थीं। ईरान का कहना है कि यह हमला जानबूझकर शोक की घड़ी में किया गया ताकि ईरानी नेतृत्व को संभलने का मौका न मिले।

इस समय कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं और वैश्विक शेयर बाजारों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। दो परमाणु शक्तियों के बीच यह आर-पार की लड़ाई अब एक वैश्विक तबाही की ओर बढ़ती दिख रही है।

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