7 हजार करोड़ का मुंबई-पुणे मिसिंग लिंक प्रोजेक्ट: पहली ही बारिश में कैसे ढह गई सुरक्षा की दीवार?
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महाराष्ट्र में जारी मूसलाधार बारिश ने मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर बने अत्याधुनिक मिसिंग लिंक प्रोजेक्ट की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 6,695 करोड़ रुपये की लागत से बने इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का उद्घाटन महज दो महीने पहले ही हुआ था, लेकिन सोमवार को हुए भूस्खलन ने इसे ठप कर दिया।

आधी रात को हुआ हादसा

सोमवार तड़के करीब 3:15 बजे खंडाला के पास सुरंग नंबर-2 के एग्जिट पर पहाड़ी का एक बड़ा हिस्सा अचानक टूटकर नीचे आ गिरा। लगातार बारिश से कमजोर हुई मिट्टी के कारण भारी मात्रा में मलबा और चट्टानें सड़क पर आ गईं, जिससे सुरक्षा दीवार पूरी तरह ध्वस्त हो गई। सुबह 4 बजे प्रशासन को एहतियात के तौर पर इस नए मार्ग को बंद करना पड़ा।

भारी मलबे से थमा ट्रैफिक

हादसे के बाद मुंबई-पुणे के बीच आवाजाही करने वाले हजारों यात्री घंटों तक जाम में फंसे रहे। पुराने मुंबई-पुणे हाईवे की ओर वाहनों को डायवर्ट करने के कारण वहां भारी दबाव बढ़ गया। कई यात्रियों की फ्लाइट और महत्वपूर्ण बैठकें छूट गईं। प्रशासन ने जेसीबी और बुलडोजर की मदद से युद्धस्तर पर सफाई अभियान चलाया।

प्रशासन का बचाव: यह प्राकृतिक आपदा है

महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (MSRDC) के उपाध्यक्ष अनिलकुमार गायकवाड़ ने स्पष्ट किया कि यह किसी निर्माण की विफलता नहीं, बल्कि एक प्राकृतिक आपदा है। उन्होंने बताया कि आईआईटी बॉम्बे की सलाह पर यहां 15 मीटर तक रॉक बोल्टिंग और लोहे की जालियां लगाई गई थीं, लेकिन जो चट्टानें गिरीं, वे 150 मीटर की ऊंचाई से आई थीं, जिन्हें रोकना किसी भी इंजीनियरिंग के लिए एक बड़ी चुनौती है।

क्या है मिसिंग लिंक की खासियत?

मई 2026 में शुरू हुआ यह 13 किलोमीटर लंबा बाईपास खंडाला घाट के खतरनाक मोड़ों से मुक्ति दिलाने के लिए बनाया गया था। इसमें देश का सबसे ऊंचा 182 मीटर लंबा केबल ब्रिज और दुनिया की सबसे चौड़ी सड़क सुरंगों में शामिल 8.9 किलोमीटर लंबी टनल भी शामिल है। इसका उद्देश्य यात्रा के समय को 30 मिनट तक कम करना था।

विपक्ष का हमला और सरकार का भविष्य का प्लान

उद्घाटन के महज दो महीने के भीतर हुए इस भूस्खलन ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। आदित्य ठाकरे और रोहित पवार जैसे विपक्षी नेताओं ने निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं और निष्पक्ष जांच की मांग की है।

वहीं, सरकार ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल प्राथमिकता यात्रियों की सुरक्षा है। मानसून के बाद पूरे पहाड़ी इलाके की दोबारा भूगर्भीय (Geological) जांच कराई जाएगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को टालने के लिए और अधिक सुरक्षा मानकों को लागू किया जाएगा। फिलहाल, मुंबई से पुणे जाने वाले मार्ग को बहाल कर दिया गया है, लेकिन सुरक्षा के मद्देनजर अभी भी पूरे रूट पर सतर्कता बरती जा रही है।

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