संजू सैमसन नहीं होते तो अजीत अगरकर भी सिलेक्टर नहीं होते - पूर्व क्रिकेटर का बड़ा दावा
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जिम्बाब्वे दौरे के लिए घोषित हुई टीम इंडिया में स्टार विकेटकीपर-बल्लेबाज संजू सैमसन को जगह न मिलने पर विवाद गहरा गया है। अब पूर्व भारतीय क्रिकेटर सदागोपन रमेश ने चीफ सिलेक्टर अजीत अगरकर पर तीखे सवाल उठाए हैं और उन्हें सीधे तौर पर निशाने पर लिया है।

अगरकर की कुर्सी संजू की बदौलत सुरक्षित सदागोपन रमेश ने अपने यूट्यूब चैनल पर दावा किया कि चीफ सिलेक्टर अजीत अगरकर का कार्यकाल संजू सैमसन के शानदार प्रदर्शन के कारण ही आगे बढ़ा है। रमेश के अनुसार, अगरकर का कार्यकाल जून में समाप्त हो रहा था, लेकिन टी20 वर्ल्ड कप में भारत की खिताबी जीत के बाद इसे बढ़ाया गया। उनका मानना है कि उस जीत में संजू की भूमिका निर्णायक थी, वरना अगरकर आज पद पर नहीं होते।

सिलेक्टर्स के फैसले पर भड़के रमेश रमेश ने चयनकर्ताओं के रवैये की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा, वर्ल्ड कप में प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट रहने वाले खिलाड़ी को महज तीन मैचों के बाद बाहर करना बहुत गलत व्यवहार है। उनका तर्क है कि हाल ही में संजू ने केवल 6 रन बनाए, लेकिन टीम की जीत में उनके योगदान को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया गया।

टीम हित को दी व्यक्तिगत उपलब्धियों से ऊपर पूर्व क्रिकेटर ने याद दिलाया कि कैसे संजू सैमसन ने वर्ल्ड कप के दौरान वेस्टइंडीज के खिलाफ नाबाद 97 रन, और इंग्लैंड व न्यूजीलैंड के खिलाफ सेमीफाइनल और फाइनल में 89-89 रनों की यादगार पारियां खेलीं। उन्होंने कहा, संजू के पास शतक जड़ने का मौका था, लेकिन उन्होंने अपने व्यक्तिगत रिकॉर्ड से ऊपर टीम की जीत को रखा। ऐसे खिलाड़ी को समर्थन मिलना चाहिए, न कि कुछ खराब पारियों के आधार पर बाहर का रास्ता दिखाया जाना चाहिए।

चयन प्रक्रिया पर उठे बड़े सवाल रमेश ने यह भी आरोप लगाया कि चयनकर्ताओं ने हालिया तीन मैचों की असफलता को तो देखा, लेकिन यह भूल गए कि वही खिलाड़ी भारत को वर्ल्ड कप जिताने का मुख्य शिल्पकार रहा है। उन्होंने हैरानी जताते हुए कहा कि आयरलैंड सीरीज में तो पूरी टीम ही फ्लॉप रही थी, तो फिर केवल संजू को ही बलि का बकरा क्यों बनाया गया।

फिलहाल, इस मुद्दे पर बीसीसीआई या अजीत अगरकर की ओर से कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई है, लेकिन सोशल मीडिया पर फैंस का गुस्सा चरम पर है।

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