भारत अब हथियारों का आयातक नहीं, बल्कि एक उभरता हुआ निर्यातक (Exporter) बन चुका है। फिलीपींस और वियतनाम को ब्रह्मोस मिसाइलें सौंपने के बाद, अब भारत अपनी बेहद घातक अस्त्र मार्क-1 (Astra Mk-1) मिसाइल को इंडोनेशिया को निर्यात करने की तैयारी में है। रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर मिसाइलों की आपूर्ति में आई बाधाओं ने दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों को भारत की ओर देखने पर मजबूर कर दिया है।
क्या है अस्त्र मार्क-1? अस्त्र एक बियॉन्ड विजुअल रेंज (BVR) हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल है, जिसे रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने विकसित किया है। अस्त्र का संस्कृत में अर्थ हथियार होता है। यह मिसाइल इतनी सक्षम है कि अगर दुश्मन का लड़ाकू विमान पायलट की आंखों से ओझल भी हो, तो भी यह उसे रडार के जरिए ढूंढकर तबाह कर सकती है।
110 किलोमीटर की मारक क्षमता अस्त्र मार्क-1 की सबसे बड़ी खूबी इसकी रेंज है। यह 110 किलोमीटर की दूरी तक अपने लक्ष्य को भेद सकती है। यानी दुश्मन के विमान को पता चलने से पहले ही यह उसे हवा में परखच्चे उड़ाने की क्षमता रखती है। फिलहाल DRDO इसके भविष्य के वेरिएंट अस्त्र मार्क-2 पर भी काम कर रहा है, जो 160 से 200 किलोमीटर तक की मार करने में सक्षम होगा।
सुपरसोनिक रफ्तार से बच पाना नामुमकिन यह मिसाइल ध्वनि की गति से 4.5 गुना (Mach 4.5) तेज उड़ती है। अपनी सुपरसोनिक गति और अत्याधुनिक रडार सीकर के कारण, दुश्मन के फुर्तीले फाइटर जेट्स के लिए इस मिसाइल से बच निकलना लगभग नामुमकिन होता है। यह इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर के जटिल माहौल में भी अपने लक्ष्य पर सटीक निशाना साधती है।
इंडोनेशिया और सुखोई का कनेक्शन इंडोनेशिया अपनी वायुसेना के सुखोई (Su-30) बेड़े के लिए इस मिसाइल को लेने का इच्छुक है। भारत ने पहले ही सुखोई-30 MKI पर इसका सफल परीक्षण और एकीकरण (Integration) कर लिया है। इसके अलावा, भारत इसे अपने स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान तेजस में भी शामिल कर रहा है, जिससे इसकी बहुआयामी उपयोगिता साबित होती है।
अस्त्र मार्क-1 और मार्क-2 में मुख्य अंतर
| विशेषता | अस्त्र Mk-1 | अस्त्र Mk-2 | | :--- | :--- | :--- | | रेंज | 110 किमी | 160-200 किमी | | इंजन | सिंगल पल्स सॉलिड रॉकेट मोटर | ड्यूल पल्स सॉलिड रॉकेट मोटर | | स्थिति | भारतीय वायुसेना में सक्रिय | विकास/परीक्षण चरण में |
निष्कर्ष भारत का रक्षा क्षेत्र न केवल आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है, बल्कि वैश्विक रक्षा बाजार में भी अपनी धाक जमा रहा है। अस्त्र जैसी मिसाइलों के सफल निर्यात से न केवल भारत की विदेशी मुद्रा बढ़ेगी, बल्कि दुनिया भर में भारत की स्वदेशी तकनीक पर भरोसा भी मजबूत होगा।
*DRDO and IAF successfully flight-tested the indigenous ASTRA BVRAAM with an indigenous 🇮🇳 RF seeker from a Su-30 MKI off the Odisha coast on July 11, 2025.
— Defence Core (@Defencecore) July 11, 2025
2 missiles were launched against high-speed unmanned targets at multiple ranges, both hitting the targets with pinpoint… pic.twitter.com/SIcyP7ngSC
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