अप्रैल 2025 से देशभर में E20 पेट्रोल (20% एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) अनिवार्य होने के बाद से वाहन मालिकों के बीच असमंजस की स्थिति है। एक तरफ जहां सरकार इसे ऊर्जा सुरक्षा और किसानों की आय से जोड़कर देख रही है, वहीं दूसरी तरफ पुराने वाहनों के लॉन्ग-टर्म परफॉरमेंस को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) की एक गोपनीय रिपोर्ट में चिंताजनक संकेत दिए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, जो पुराने वाहन E10 (10% एथेनॉल) के लिए डिजाइन किए गए थे, उनमें E20 के इस्तेमाल से रबर और प्लास्टिक के हिस्सों—जैसे फ्यूल होज, गैस्केट, सील और ओ-रिंग—के जल्दी खराब होने का खतरा है। समय के साथ इन्हें बदलने की जरूरत पड़ सकती है, जो वाहन मालिकों की जेब पर अतिरिक्त भार डाल सकता है।
इंजन की मजबूती जांचने के लिए किए गए परीक्षणों में मिले-जुले नतीजे सामने आए। एक BS-VI टर्बो इंजन की 809 घंटे की टेस्टिंग के दौरान थर्मोमैकेनिकल फेलियर देखा गया। इसका मतलब है कि अत्यधिक गर्मी और दबाव के कारण एग्जॉस्ट वाल्व टेढ़ा हो सकता है या उसमें दरारें आ सकती हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का तर्क है कि इसे पूरी तरह E20 की खराबी नहीं माना जा सकता, क्योंकि इंजन की मानक टेस्टिंग आमतौर पर 2,000 घंटे की होती है। इसके विपरीत, दोपहिया वाहनों ने टेस्टिंग में बेहतर प्रदर्शन किया।
E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से वाहनों के माइलेज में 2 से 6 प्रतिशत तक की कमी देखी गई है। हालांकि, तकनीकी रूप से धातु के हिस्सों पर कोई बुरा असर नहीं दिखा है, लेकिन एथेनॉल की नमी सोखने की क्षमता के कारण पुराने वाहनों में जंग लगने की आशंका को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता।
मारुति सुजुकी, टोयोटा, हुंडई और हीरो मोटोकॉर्प जैसी दिग्गज कंपनियों का कहना है कि उनके सर्विस रिकॉर्ड्स में E20 से किसी बड़े या असामान्य नुकसान का प्रमाण नहीं मिला है। कंपनियों का दावा है कि भारत की प्रमाणन प्रक्रिया अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप है और मौजूदा वाहनों को किसी विशेष बदलाव की जरूरत नहीं है।
फिलहाल पेट्रोल पंपों पर सिर्फ E20 विकल्प ही मौजूद है, जिससे वाहन मालिक अपनी गाड़ियों की लंबी उम्र को लेकर चिंतित हैं। आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी प्रधानमंत्री से मांग की है कि पेट्रोल पंपों पर E20 के साथ ही E10 और सामान्य पेट्रोल (E0) का विकल्प भी उपलब्ध कराया जाए, ताकि उपभोक्ता अपनी जरूरत के अनुसार चुनाव कर सकें।
सरकार अब E22 से लेकर E30 तक के मानकों पर काम कर रही है, जो यह दर्शाता है कि भविष्य में एथेनॉल का मिश्रण और बढ़ सकता है। ऐसे में पुराने वाहनों की सुरक्षा और माइलेज का मुद्दा आने वाले समय में और अधिक चर्चा का विषय बना रहेगा।
#WATCH | Delhi | AAP National Convenor Arvind Kejriwal says, With folded hands, I request Modi ji to agree to the demand of the public to give them an option -where all variants of fuel, be it E20, E10 or E0 -all are made available at petrol pumps at separate pricing. pic.twitter.com/X2kDwAAXXu
— ANI (@ANI) July 7, 2026
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