अब राजनीति का नहीं, धर्म रक्षा का है संकल्प: दिग्विजय सिंह की अयोध्या यात्रा पर मचा सियासी घमासान
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मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने एक बड़ा राजनीतिक और आध्यात्मिक ऐलान किया है। उन्होंने कहा है कि वे अब राजनीति से ऊपर उठकर धर्म रक्षा की राह पर चलेंगे और अपनी आखिरी सांस तक सनातन धर्म की रक्षा के लिए समर्पित रहेंगे।

2 अक्टूबर से उज्जैन से अयोध्या तक पदयात्रा दिग्विजय सिंह 2 अक्टूबर से उज्जैन से अयोध्या तक लगभग 1,000 किलोमीटर लंबी पदयात्रा शुरू करने जा रहे हैं। इस यात्रा को उन्होंने पूरी तरह से गैर-राजनीतिक करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस यात्रा में किसी भी राजनीतिक पार्टी का झंडा नहीं होगा और इसमें भगवान राम में आस्था रखने वाला कोई भी व्यक्ति शामिल हो सकता है।

संतोष दुबे होंगे मुख्य अतिथि जब उनसे पूछा गया कि क्या वे इस यात्रा में राहुल गांधी को आमंत्रित करेंगे, तो उन्होंने साफ मना कर दिया। उन्होंने कहा, मैं किसी को नहीं बुलाऊंगा। हालांकि, उन्होंने एक खास नाम का जिक्र करते हुए कहा कि वे कारसेवक संतोष दुबे को जरूर बुलाएंगे। संतोष दुबे वही व्यक्ति हैं, जिन्हें राम मंदिर आंदोलन के दौरान चार बार गोली लगी थी। उन्हें इस यात्रा का मुख्य अतिथि बनाया जाएगा।

चंदा चोरों पर सख्त रुख दिग्विजय सिंह ने मंदिर निर्माण में कथित चंदा चोरी को लेकर भी हमला बोला। उन्होंने अपने घर के बाहर एक बैनर लगाया है जिस पर लिखा है— राम मंदिर के चंदा चोरों और चढ़ावा चोरों का प्रवेश वर्जित है। उनका कहना है कि जो लोग इस चंदा चोरी के खिलाफ हैं, वे उनकी यात्रा में शामिल हो सकते हैं। इस दौरान वे सोशल मीडिया (फेसबुक और ट्विटर) से पूरी तरह दूरी बना लेंगे।

बीजेपी का तीखा पलटवार दिग्विजय सिंह के इस रुख पर बीजेपी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। बीजेपी प्रवक्ता डॉ. हितेश वाजपेयी ने तंज कसते हुए कहा कि दिग्विजय सिंह को इस यात्रा में जाकिर नाइक जैसे विचारों वाले लोगों को बुलाना चाहिए।

वहीं, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा, राम मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। कांग्रेस पार्टी ने हमेशा देश की आस्था को ठेस पहुंचाने का काम किया है।

सियासी गलियारों में चर्चा दिग्विजय सिंह के इस नए धर्म रक्षा अभियान ने मध्य प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। एक तरफ जहां कांग्रेस इसे आस्था का विषय बता रही है, वहीं बीजेपी इसे कांग्रेस का ढोंग करार दे रही है। अब देखना यह होगा कि 1,000 किलोमीटर लंबी यह पदयात्रा आने वाले समय में क्या नया मोड़ लेती है।

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