नई दिल्ली: अयोध्या राम मंदिर में हुए चढ़ावा चोरी मामले ने अब राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। इस मुद्दे पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने केंद्र सरकार और राम मंदिर ट्रस्ट पर तीखा प्रहार किया है। गहलोत ने स्पष्ट रूप से कहा है कि ट्रस्ट की विश्वसनीयता खत्म हो चुकी है और इसे तत्काल प्रभाव से भंग कर देना चाहिए।
चोरी नहीं, यह डकैती है गहलोत ने राम मंदिर निर्माण समिति के चेयरमैन के उस बयान का हवाला दिया, जिसमें इसे चोरी नहीं, बल्कि डकैती करार दिया गया था। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जब आरएसएस और बीजेपी खुद मान रहे हैं कि गड़बड़ हुई है, तो फिर ट्रस्ट के बने रहने का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने कहा, ट्रस्ट को भंग किए बिना लोगों का विश्वास बहाल नहीं हो सकता।
SIT जांच पर जताया संदेह मामले की जांच को लेकर गहलोत ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस की एसआईटी (SIT) पर भरोसा नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह जांच निष्पक्ष होने की उम्मीद नहीं है। उन्होंने मांग की कि इस पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के किसी रिटायर्ड जज की निगरानी में होनी चाहिए।
नया ट्रस्ट बनाने की मांग कांग्रेस नेता ने मांग की है कि मौजूदा ट्रस्ट को हटाकर धार्मिक गुरुओं और धर्माचार्यों को शामिल कर एक नया ट्रस्ट गठित किया जाए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी इस संवेदनशील मुद्दे पर अपनी चुप्पी तोड़ने की अपील की है।
EVM पर भी साधा निशाना राम मंदिर मुद्दे के साथ-साथ अशोक गहलोत ने ईवीएम (EVM) पर भी अपनी पुरानी मांग दोहराई। भारत और इंडोनेशिया के बीच ईवीएम एमओयू पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा, सुप्रीम कोर्ट ने वीवीपैट (VVPAT) की अनिवार्यता पर जोर दिया है, जो खुद इस बात का संकेत है कि चुनाव प्रक्रिया में संदेह की गुंजाइश है। उन्होंने विकसित देशों का उदाहरण देते हुए बैलेट पेपर से चुनाव कराने की पुरजोर वकालत की।
विपक्ष का बढ़ता दबाव गौरतलब है कि कांग्रेस संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल के बाद अब गहलोत के इस बयान ने विपक्षी खेमे में हलचल तेज कर दी है। पार्टी ने मांग की है कि राम मंदिर जैसे पवित्र स्थान के प्रबंधन में पारदर्शिता लाने के लिए सरकार तुरंत कड़े कदम उठाए और जवाबदेही तय करे।
*हमारी मांग 👇
— Congress (@INCIndia) July 7, 2026
⦿ अयोध्या के राम मंदिर में हुई चढ़ावा चोरी के बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भंग कर देना चाहिए
⦿ सुप्रीम कोर्ट जज के द्वारा इस मामले की जांच होनी चाहिए
⦿ अयोध्या राम मंदिर के लिए धार्मिक और धर्माचार्यों को लेकर नया ट्रस्ट बनाया जाए
⦿… pic.twitter.com/vbMhWZlCls
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