मोदी की भी बारी आएगी... : बदरुद्दीन अजमल ने विपक्ष को दी चेतावनी, राहुल गांधी पर भी उठाए सवाल
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असम के चर्चित नेता और AIUDF प्रमुख बदरुद्दीन अजमल का एक बयान सियासी गलियारों में हलचल मचा रहा है। विपक्षी दलों में जारी बिखराव के बीच अजमल ने न केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला है, बल्कि कांग्रेस और राहुल गांधी को अपनी रणनीति बदलने की सख्त नसीहत भी दी है।

आज मोदी तोड़ रहे हैं, कल उन्हें तोड़ा जाएगा अजमल ने विपक्षी दलों के टूटने पर बेबाक राय रखते हुए कहा कि आज मोदी का राज है और वह तमाम दलों को तोड़ रहे हैं, लेकिन यह सिलसिला हमेशा नहीं चलेगा। उन्होंने दावा किया, जिस तरह आज मोदी दूसरों के घर तोड़ रहे हैं, एक दिन उनकी भी बारी आएगी। सब मिलकर उन्हें भी तोड़ देंगे। हमें डरना नहीं चाहिए, बल्कि एकजुट रहना चाहिए।

राहुल गांधी को नींद से जागने की सलाह अजमल ने राहुल गांधी को निशाने पर लेते हुए कहा कि उन्हें नींद से जागना होगा। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि गठबंधन के बावजूद राहुल गांधी का हर छोटी जगह पर चुनाव लड़ना विपक्ष की एकता को नुकसान पहुंचा रहा है। उन्होंने बंगाल का उदाहरण देते हुए कहा कि अगर वहां राहुल गांधी उम्मीदवार नहीं उतारते, तो शायद ममता बनर्जी का यह हाल न होता।

रूस जैसा राष्ट्रपति शासन लाना चाहते हैं मोदी बदरुद्दीन अजमल ने देश के भविष्य को लेकर एक गंभीर आशंका जताई है। उन्होंने कहा कि अगर विपक्षी दल समय रहते एकजुट नहीं हुए, तो एनडीए सबको निगल जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि नरेंद्र मोदी रूस की तरह भारत में राष्ट्रपति का शासन लाना चाहते हैं। अजमल के मुताबिक, वन नेशन, वन इलेक्शन और वन थ्योरी का एजेंडा इसी दिशा में उठाया गया कदम है।

आपसी फूट का फायदा उठा रहा दुश्मन विपक्ष की कमजोरी पर बात करते हुए अजमल ने कहा कि आपस में इत्तेफाक न होने की वजह से ही दुश्मन (भाजपा) इसका फायदा उठा रहा है। उन्होंने महाराष्ट्र का जिक्र करते हुए पूछा कि जब कांग्रेस के साथ गठबंधन है, तो पार्टी वहां अपने उम्मीदवार क्यों खड़े करती है? उन्होंने साफ कहा कि आपसी बिखराव ही विपक्ष की सबसे बड़ी हार का कारण बन रहा है।

गठबंधन की टूटी डोर और चुनावी सबक गौरतलब है कि 2021 के चुनाव में AIUDF और कांग्रेस का गठबंधन था, जिसका असर बेहतर रहा था। लेकिन इस बार अलग-अलग लड़ने से दोनों दलों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। कई सीटों पर गठबंधन न होने का सीधा फायदा एनडीए को मिला। अब अजमल का यह बयान विपक्षी एकता की जरूरत पर फिर से बहस छेड़ चुका है।

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