कर्नाटक: वोटर वेरिफिकेशन में धांधली का आरोप, मस्जिदों और मैरिज हॉल में भरे जा रहे SIR फॉर्म; BJP-JDS ने चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाया
News Image

बेंगलुरु: कर्नाटक में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) अभियान को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। एनडीए नेताओं ने राज्य चुनाव आयोग से शिकायत की है कि बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) घर-घर जाकर सत्यापन करने के बजाय मस्जिदों, मैरिज हॉल और कम्युनिटी सेंटरों में कैंप लगाकर फॉर्म भरवा रहे हैं। भाजपा और जेडीयू का आरोप है कि राज्य की कॉन्ग्रेस सरकार वोट बैंक बढ़ाने के लिए घुसपैठियों को वोटर लिस्ट में शामिल करने की साजिश रच रही है।

क्या है चुनाव आयोग के नियम? चुनाव आयोग के स्पष्ट निर्देश हैं कि SIR अभियान के तहत BLO को अनिवार्य रूप से घर-घर जाकर सत्यापन करना चाहिए और हर सदस्य की व्यक्तिगत पहचान सुनिश्चित करनी चाहिए। हालांकि, कर्नाटक में कई स्थानों पर इसके विपरीत प्रक्रिया अपनाई जा रही है। विजयपुरा, बेंगलुरु, रामनगर और मंड्या जैसे इलाकों से आई शिकायतों के अनुसार, BLOs ने लोगों को सार्वजनिक स्थानों और मस्जिदों में बुलाकर फॉर्म जमा कराए हैं, जो प्रोटोकॉल का सीधा उल्लंघन है।

NDA का गंभीर आरोप: वोट शेयर बढ़ाने की साजिश केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी और भाजपा नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य चुनाव आयुक्त से मुलाकात कर पूरी प्रक्रिया को रद्द करने और इसे दोबारा शुरू करने की मांग की है। कुमारस्वामी ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार प्रशासनिक मशीनरी का दुरुपयोग कर रही है। भाजपा विधायक कृष्णप्पा ने दावा किया कि व्हाट्सएप ग्रुपों के जरिए लोगों को इन कैंपों में आने के लिए प्रोत्साहित किया गया ताकि एक विशेष वर्ग का वोट शेयर बढ़ाया जा सके।

सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल भाजपा नेताओं ने चिंता जताई है कि इस अनियमितता का फायदा अवैध प्रवासियों और रोहिंग्याओं को मिल सकता है। उन्होंने कहा कि तटीय इलाकों और बेंगलुरु में घुसपैठियों की बढ़ती संख्या डेमोग्राफी के लिए खतरा है। पूर्व में छापेमारी के दौरान कई घुसपैठियों के पास फर्जी आधार और वोटर आईडी कार्ड मिले हैं। एनडीए का कहना है कि अगर सत्यापन प्रक्रिया पारदर्शी नहीं रही, तो देश के दुश्मन और अवैध नागरिक लोकतंत्र का हिस्सा बन जाएंगे।

क्या है अगली मांग? NDA नेताओं ने मांग की है कि कर्नाटक में अब तक हुए SIR को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाए। भाजपा और JDS ने इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए राज्य से बाहर के अधिकारियों को नियुक्त करने की मांग की है। वहीं, राज्य सरकार के मंत्रियों की इस मुद्दे पर चुप्पी को लेकर भी विपक्षी नेताओं ने सवाल उठाए हैं। अब सबकी नजरें भारत के चुनाव आयोग पर हैं कि क्या वह इन गंभीर शिकायतों के बाद कर्नाटक में पूरी प्रक्रिया को फिर से शुरू करने का आदेश देता है।

*

कुछ अन्य वेब स्टोरीज

Story 1

Jr NTR की फिल्म विवादों में: भगवान मुरुगन के इतिहास से छेड़छाड़ का आरोप, तमिलनाडु में बैन की मांग

Story 1

तोप का लाइसेंस मांग रहे राजभर को मिलेगा कट्टा ? एनडीए की बैठक के बाद सियासी बयानबाजी तेज

Story 1

जब पटरियों पर नाव बनकर दौड़ी वंदे भारत: मुंबई की बारिश में वायरल वीडियो ने उड़ाए होश

Story 1

116 साल की उम्र में अद्भुत जज्बा: दादी ने चढ़ीं तिरुपति की 3550 सीढ़ियां, वीडियो देख दंग रह गई दुनिया

Story 1

क्या बिल्ली के श्राप ने डुबो दिया ब्राजील का सपना? FIFA World Cup से बाहर होते ही फिर सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

Story 1

चंपत राय की जगह लेंगे कृष्ण मोहन: राम मंदिर ट्रस्ट में बड़ा बदलाव, जानें कौन हैं नए कार्यवाहक महासचिव

Story 1

NEET UG 2026: रिफंड का पैसा आना शुरू, बैंक डिटेल्स सुधारने के लिए बचा सिर्फ 1 दिन

Story 1

दिल्ली में आम महोत्सव का आगाज़: 400 किस्मों के साथ सजेगा स्वाद का मेला

Story 1

जिम्बाब्वे दौरे के लिए टीम इंडिया का एलान: संजू सैमसन बाहर, दो नए चेहरों को मिला बड़ा मौका

Story 1

खामेनेई का अंतिम सफर: तेहरान की सड़कों पर प्रतिशोध की दहाड़, अमेरिका-इजराइल के खिलाफ उबला जनसैलाब