UGC NET 2026 विवाद: 67 सवालों के दोहराव और गलत नामों ने NTA की साख पर उठाए सवाल
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नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) एक बार फिर विवादों के घेरे में है। इस बार मामला यूजीसी नेट जून 2026 की परीक्षा का है, जहां अभ्यर्थियों ने इंग्लिश और सोशियोलॉजी के प्रश्नपत्रों में गंभीर गड़बड़ियों का आरोप लगाया है। परीक्षा की गुणवत्ता और पारदर्शिता पर उठे इन सवालों ने छात्रों के बीच हड़कंप मचा दिया है।

इंग्लिश पेपर: 67 पुराने सवालों का दोहराव अभ्यर्थियों का दावा है कि इंग्लिश विषय के पेपर-II में पूछे गए 150 सवालों में से 67 प्रश्न सीधे तौर पर साल 2024 की परीक्षा से उठाए गए हैं। छात्रों का कहना है कि न केवल प्रश्न पुराने हैं, बल्कि उनके विकल्पों का क्रम भी वैसा ही है। इससे उन छात्रों को अनुचित लाभ मिलने की संभावना है जिन्होंने केवल पुराने प्रश्नपत्र रटे हैं, जो कि एक राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा की निष्पक्षता पर बड़ा सवाल है।

सोशियोलॉजी पेपर: नाम और शब्दों में भारी गलतियां इंग्लिश के अलावा 30 जून को आयोजित सोशियोलॉजी के पेपर में भी अव्यवस्था सामने आई है। छात्रों ने सोशल मीडिया पर स्क्रीनशॉट साझा करते हुए बताया है कि प्रश्नपत्र में व्याकरण और अनुवाद की अनेक त्रुटियां थीं।

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि समाजशास्त्र के मशहूर विद्वानों के नाम ही गलत लिख दिए गए। जॉर्ज रिट्जर (George Ritzer) को Putzer , टालकॉट पार्सन्स (Talcott Parsons) को Parsow और जी. एस. घुरिये (G. S. Ghurye) को Ghunye के रूप में छापा गया। Social शब्द की जगह Oval लिखा गया, जिससे कई सवाल समझने में ही मुश्किल हो गए।

कानूनी शिकंजा: NTA तक पहुंची शिकायत इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए एडवोकेट विनीत जिंदल ने NTA के महानिदेशक के पास आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी साझा करते हुए उन्होंने इस प्रकरण की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

क्या अब परीक्षा की विश्वसनीयता पर संकट? यूजीसी नेट एक अत्यंत महत्वपूर्ण परीक्षा है, जो असिस्टेंट प्रोफेसर और पीएचडी प्रवेश की पात्रता तय करती है। प्रश्नपत्रों में इस तरह की लापरवाही न केवल छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है, बल्कि NTA की कार्यप्रणाली पर भी सवालिया निशान लगाती है।

फिलहाल, NTA की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। छात्रों की नज़रें अब एजेंसी के अगले कदम पर टिकी हैं कि क्या NTA अपनी गलती स्वीकार करते हुए कोई सुधारवादी निर्णय लेगा या यह विवाद और तूल पकड़ेगा।

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