#BRICS का ड्रग्स वॉर: पूर्वोत्तर ही क्यों चुना भारत ने? समझें गोल्डन ट्रायंगल का खतरनाक जाल
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नशे के खिलाफ वैश्विक लड़ाई अब पूर्वोत्तर भारत के केंद्र में आ गई है। हाल ही में असम की राजधानी गुवाहाटी में BRICS देशों के एंटी-ड्रग प्रमुखों की दो दिवसीय बैठक आयोजित की गई। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के नेतृत्व में हुई इस बैठक का मुख्य उद्देश्य मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ एक साझा अंतरराष्ट्रीय रणनीति तैयार करना है।

असम का चयन: संवेदनशीलता और जरूरत भारत ने इस बैठक के लिए पूर्वोत्तर का चयन यूं ही नहीं किया है। पिछले पांच वर्षों में असम में नशे का जाल चिंताजनक रूप से फैला है। आंकड़ों के अनुसार, असम में 2,919 करोड़ रुपये की ड्रग्स जब्त की गई हैं और 23,000 से अधिक लोग गिरफ्तार किए गए हैं। केवल 2025 में ही NDPS के तहत 3,000 से ज्यादा मामले दर्ज हुए, जो यह साबित करते हैं कि पूर्वोत्तर अब ड्रग्स का नया ट्रांजिट रूट बन चुका है।

गोल्डन ट्रायंगल का खौफनाक नेटवर्क म्यांमार, लाओस और थाईलैंड का संगम स्थल गोल्डन ट्रायंगल दुनिया भर में ड्रग्स उत्पादन का कुख्यात हब है। भारत के मणिपुर, मिजोरम, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश की म्यांमार के साथ लगती लंबी और दुर्गम सीमाएं तस्करों के लिए सबसे आसान एंट्री पॉइंट बनी हुई हैं।

NCB डायरेक्टर अनुराग गर्ग ने स्पष्ट किया कि अब तस्करी डार्कनेट, सिंथेटिक ड्रग्स और समुद्री रास्तों के जटिल जाल के जरिए हो रही है, जिसे रोकने के लिए वैश्विक सहयोग अनिवार्य है।

क्या मणिपुर में शिफ्ट हो रहा है ड्रग नेटवर्क? पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने चेतावनी दी है कि एक बड़ी साजिश के तहत गोल्डन ट्रायंगल के नेटवर्क को म्यांमार से मणिपुर की ओर शिफ्ट करने की कोशिश की जा रही है। मिजोरम के कोलासिब और चम्फाई तथा मणिपुर के चुराचांदपुर जिले इन तस्करों के मुख्य गलियारे बन गए हैं। यहां के घने जंगलों और दुर्गम इलाकों का फायदा उठाकर हेरोइन और मेथामफेटामाइन टैबलेट्स देश के भीतर पहुंचाई जा रही हैं।

ड्रग्स, फ्रॉड और साइबर क्राइम का गठजोड़ म्यांमार के शान और काचिन प्रांत न केवल ड्रग्स के उत्पादन केंद्र हैं, बल्कि यहां से बड़े पैमाने पर फाइनेंशियल फ्रॉड भी संचालित हो रहे हैं। युवाओं को नौकरी का लालच देकर वहां बुलाया जाता है और फिर उन्हें एआई (AI) के जरिए साइबर फ्रॉड करने पर मजबूर किया जाता है। हाल ही में केरल के एक युवक की वापसी ने इस खौफनाक सच्चाई को उजागर किया था।

अगली रणनीति: ज़ीरो टॉलरेंस और वर्चुअल वर्किंग ग्रुप ब्रिक्स बैठक में भारत ने अपनी ज़ीरो टॉलरेंस नीति को मजबूती से आगे रखा है। सूत्रों के मुताबिक, ड्रग्स की तस्करी रोकने के लिए एक विशेष BRICS वर्चुअल वर्किंग ग्रुप बनाने का प्रस्ताव रखा गया है। यह ग्रुप खुफिया जानकारी साझा करने और तस्करी के रास्तों को ब्लॉक करने के लिए वास्तविक समय में (Real-time) समन्वय करेगा।

पूर्वोत्तर का यह मोर्चा केवल भारत की सुरक्षा नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नशे के उस दानव को रोकने की कोशिश है, जो अब गोल्डन ट्रायंगल के जरिए देश की युवा पीढ़ी को खोखला करने की साजिश रच रहा है।

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