पूर्णिया: सावन की फुहारों के साथ ही शिवभक्तों की आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा है। पूर्णिया जिले के जलालगढ़ स्थित जलेश्वरनाथ महादेव मंदिर इन दिनों भक्ति के केंद्र में है। करीब एक सदी पुरानी परंपरा को समेटे यह मंदिर न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रमुख केंद्र भी बन चुका है।
इतिहास और श्रद्धा का संगम जलेश्वरनाथ महादेव मंदिर का इतिहास लगभग 100 साल पुराना है। स्थानीय लोगों के अनुसार, जलालगढ़ के नेताजी चौक स्थित काली मंदिर परिसर में इस शिवलिंग की स्थापना के साथ ही पूजा-अर्चना का सिलसिला शुरू हुआ था। बीते पांच वर्षों में मंदिर का भव्य निर्माण होने के बाद यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में भारी इजाफा हुआ है।
रुद्राभिषेक और भक्ति का माहौल सावन के महीने में मंदिर का नजारा अलौकिक होता है। आचार्य पंडित जय प्रकाश शर्मा के सानिध्य में प्रतिदिन भगवान शिव का रुद्राभिषेक किया जाता है। माना जाता है कि सावन में सच्चे मन से की गई शिव आराधना भक्तों के सभी कष्टों को हर लेती है और मनोकामनाएं पूर्ण करती है।
आकर्षण का केंद्र: भव्य संध्या आरती मंदिर में होने वाली संध्या आरती श्रद्धालुओं के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र रहती है। दीपों की रोशनी और भगवान भोलेनाथ के विशेष श्रृंगार के बीच जब हर-हर महादेव का उद्घोष गूंजता है, तो पूरा माहौल भक्तिमय हो जाता है। शाम को मंदिर परिसर में शिव स्तुति और भजन सुनने के लिए दूर-दूर से भक्त पहुंचते हैं।
इस साल सावन और सोमवारी का महत्व इस वर्ष सावन का महीना 30 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त तक रहेगा। सावन की सोमवारी का विशेष महत्व है, जो 3, 10, 17 और 24 अगस्त को पड़ रही हैं। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, रुद्राभिषेक न केवल शांति और समृद्धि लाता है, बल्कि यह ग्रहों के अशुभ प्रभाव को भी कम करने में सहायक है।
भक्तों की अटूट आस्था भले ही सावन में भीड़ अधिक होती है, लेकिन जलेश्वरनाथ महादेव के दर्शन के लिए जलालगढ़ और उसके आसपास के गांवों से भक्त साल भर आते रहते हैं। स्थानीय लोगों का विश्वास है कि यहाँ महादेव की चौखट पर जो भी आता है, वह खाली हाथ नहीं लौटता। मंदिर प्रबंधन और स्थानीय कमेटी श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्था भी सुनिश्चित करती है।
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