टीएमसी में मची खलबली: क्या ममता बनर्जी का अहंकार ले डूबा पार्टी?
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पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) इन दिनों भारी राजनीतिक संकट से जूझ रही है। पार्टी के भीतर चल रही आपसी खींचतान के बीच बीजेपी ने ममता बनर्जी पर तीखा हमला बोला है। बीजेपी नेता राहुल सिन्हा ने आरोप लगाया कि ममता ने अपने सांसदों और विधायकों को सिर्फ नौकर की तरह इस्तेमाल किया, जिसके कारण पार्टी का यह पतन हुआ है।

अभिषेक बनर्जी के स्वागत में खड़े होने का फरमान राहुल सिन्हा ने एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि चुनावी हार के बाद एक समीक्षा बैठक बुलाई गई थी। इस बैठक में निर्देश दिया गया कि जब ममता के भतीजे अभिषेक बनर्जी कमरे में प्रवेश करें, तो सभी विधायक और सांसद सम्मान में खड़े होकर तालियां बजाएं और उनके जाने पर भी उन्हें खड़ा होना होगा।

आत्म-सम्मान की लड़ाई सिन्हा के अनुसार, जिन नेताओं के पास थोड़ा भी स्वाभिमान बचा था, उन्हें यह अपमान बर्दाश्त नहीं हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता के लालच में नेताओं ने लंबे समय तक अपनी गरिमा से समझौता किया, लेकिन सत्ता गंवाने के बाद जब उन्हें अपने ही दरबारियों के सामने नौकर की तरह व्यवहार करना पड़ा, तो उनका मोहभंग हो गया। यही कारण है कि आज पार्टी छोड़कर जाने वालों की कतार लगी है।

समीकरणों में बड़ा बदलाव अप्रैल विधानसभा चुनावों के बाद से ही टीएमसी दो धड़ों में बंट चुकी है। ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट का दावा है कि उन्हें 60 से ज्यादा नवनिर्वाचित विधायकों का समर्थन प्राप्त है। इसके अलावा, लोकसभा में भी पार्टी को बड़ा झटका लगा है, जहां 28 में से 20 सांसद एनडीए खेमे में शामिल हो चुके हैं। बंगाल में अब बीजेपी सत्ता की कमान संभाल रही है।

चंद्रिमा भट्टाचार्य का इस्तीफा टीएमसी के लिए एक और बड़ा झटका तब लगा जब पार्टी की पश्चिम बंगाल इकाई की अध्यक्ष और पूर्व मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने सभी पदों से इस्तीफा दे दिया। हैरानी की बात यह है कि उन्हें जून में ही यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई थी, लेकिन महज एक महीने के भीतर ही उन्होंने पार्टी को अलविदा कह दिया।

क्या ममता का वर्चस्व खत्म हो रहा है? पार्टी कार्यालयों पर कब्जे और नेताओं के लगातार इस्तीफों ने ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। एक तरफ जहां बागी गुट खुलकर बगावत कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ शीर्ष नेतृत्व के प्रति वफादार नेताओं का दायरा सिमटता जा रहा है। देखना यह है कि बंगाल की राजनीति की यह दीदी आने वाले दिनों में अपनी पार्टी को बिखरने से कैसे बचाती हैं।

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