लॉर्ड्स में ऑस्ट्रेलिया का राज: इंग्लैंड को हराकर सातवीं बार बनी टी20 वर्ल्ड चैंपियन
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नई दिल्ली। महिला टी20 वर्ल्ड कप 2026 की विजेता का ताज एक बार फिर ऑस्ट्रेलिया के सिर सजा है। ऐतिहासिक लॉर्ड्स के मैदान पर खेले गए फाइनल मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया ने मेजबान इंग्लैंड को 7 विकेट से हराकर रिकॉर्ड सातवीं बार विश्व खिताब पर कब्जा जमाया। सोफी मोलिन्यू की कप्तानी में ऑस्ट्रेलियाई टीम पूरे टूर्नामेंट में अजेय रही।

अजेय रही ऑस्ट्रेलिया की बादशाहत ऑस्ट्रेलिया के लिए यह जीत ऐतिहासिक रही। ग्रुप स्टेज में भारत और साउथ अफ्रीका जैसी दिग्गज टीमों को पछाड़ने के बाद, सेमीफाइनल में वेस्टइंडीज को एकतरफा मुकाबले में हराकर उन्होंने फाइनल में जगह बनाई थी। पूरे टूर्नामेंट में ऑस्ट्रेलिया का दबदबा ऐसा रहा कि कोई भी टीम उन्हें हराने के करीब भी नहीं पहुँच सकी।

इंग्लैंड की संघर्षपूर्ण शुरुआत और वापसी टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी इंग्लैंड की शुरुआत बेहद खराब रही। टीम के शुरुआती दो विकेट महज 32 रन पर गिर गए। इसके बाद कप्तान नैट साइवर-ब्रंट (नाबाद 58) और फ्रेया केम्प (नाबाद 44) ने पारी को संभाला। दोनों के बीच हुई 80 रनों की साझेदारी की बदौलत इंग्लैंड 20 ओवर में 150/4 का चुनौतीपूर्ण स्कोर खड़ा करने में सफल रहा। ऑस्ट्रेलिया के लिए किम गर्थ, लूसी हैमिल्टन, एनाबेल सदरलैंड और कप्तान मोलिन्यू ने एक-एक विकेट झटका।

मूनी और लिचफील्ड की तूफानी साझेदारी 151 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी ऑस्ट्रेलिया ने जॉर्जिया वोल का विकेट जल्दी गंवा दिया। लेकिन इसके बाद बेथ मूनी और फोएबी लिचफील्ड ने इंग्लैंड के गेंदबाजी आक्रमण की धज्जियां उड़ा दीं। मूनी ने 49 गेंदों में 64 रन और लिचफील्ड ने 35 गेंदों में 48 रनों की पारी खेलकर शतकीय साझेदारी की। इस साझेदारी ने इंग्लैंड की जीत की सभी उम्मीदों पर पानी फेर दिया।

एलिस पेरी ने औपचारिकता पूरी की लिचफील्ड के आउट होने के बाद अनुभवी एलिस पेरी क्रीज पर उतरीं और उन्होंने एश्ले गार्डनर के साथ मिलकर टीम को जीत की दहलीज पार कराई। ऑस्ट्रेलिया ने 17.1 ओवर में ही 3 विकेट खोकर लक्ष्य हासिल कर लिया। इंग्लैंड की तरफ से लॉरेन बेल, चार्ली डीन और सोफी एक्लेस्टोन को एक-एक विकेट मिला, लेकिन वे ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों पर दबाव बनाने में नाकाम रहीं।

महिला क्रिकेट पर कायम है ऑस्ट्रेलियाई दबदबा इस जीत ने एक बार फिर साबित कर दिया कि बड़े मैचों में ऑस्ट्रेलिया का मानसिक स्तर बाकी टीमों से काफी बेहतर है। पिछले डेढ़ दशक से महिला क्रिकेट की दुनिया पर छाए ऑस्ट्रेलियाई दबदबे को इस सातवीं ट्रॉफी ने और अधिक मजबूत कर दिया है। यह जीत न केवल ऑस्ट्रेलिया की श्रेष्ठता को दर्शाती है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक नया बेंचमार्क भी सेट करती है।

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