पाकिस्तान: उपप्रधानमंत्री के पोते पर विदेशी महिलाओं के अपहरण और रेप का आरोप, क्रिप्टो-रैकेट से जुड़ा मामला
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लाहौर: पाकिस्तान में दो विदेशी महिलाओं के अपहरण और गैंगरेप का मामला अब एक हाई-प्रोफाइल राजनीतिक विवाद में बदल गया है। इस मामले में पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इसहाक डार के रिश्तेदार मुहम्मद रजा डार का नाम सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है।

क्रिप्टोकरेंसी की उगाही का खेल पीड़ित महिलाओं (डच और वेनेजुएला की नागरिक) ने आरोप लगाया है कि उन्हें बंधक बनाकर उनसे क्रिप्टोकरेंसी के वॉलेट पासवर्ड मांगे गए। आरोपियों ने उन्हें छोड़ने के बदले 1,00,000 डॉलर (करीब 84 लाख रुपये) की फिरौती मांगी थी। जांचकर्ताओं का मानना है कि यह अपहरण किसी रंजिश के बजाय एक सोची-समझी डिजिटल उगाही की साजिश थी।

कैसे बिछाया गया जाल? पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक, पीड़ित महिलाएं अक्टूबर 2025 में सिंगापुर में रजा डार से मिली थीं। रजा डार ने ही कथित तौर पर उन्हें पाकिस्तान आने का न्योता दिया और उनके वीजा का इंतजाम किया। 29 जून को लाहौर पहुंचते ही इन महिलाओं को एक सुनसान घर में ले जाकर बंधक बना लिया गया, जहां उनके साथ यौन शोषण और मारपीट की गई।

बढ़ती राजनीतिक मुश्किलें मुहम्मद रजा डार को पुलिस ने चार अन्य साथियों के साथ गिरफ्तार किया है। लाहौर की एक अदालत ने उन्हें पांच दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है। राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा है कि क्या रजा डार किसी बड़े क्रिप्टो-रैकेट का हिस्सा है। विपक्षी नेताओं ने इसे सत्ताधारी रसूख का दुरुपयोग बताते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

साक्ष्य जुटाना बड़ी चुनौती इस मामले में सबसे बड़ी चुनौती यह है कि दोनों पीड़ित महिलाएं पाकिस्तान से सुरक्षित वापस जा चुकी हैं। हालांकि, पुलिस अब उनके डिजिटल फुटप्रिंट्स, क्रिप्टोकरेंसी ट्रांजेक्शन और मोबाइल रिकॉर्ड्स के जरिए सबूत जुटा रही है। फोरेंसिक जांच यह तय करेगी कि क्या रजा डार के पास इस अपराध के पीछे कोई मास्टरमाइंड था, जिसका नाम FIR में भी शामिल है।

सुरक्षा और जवाबदेही पर सवाल यह घटना पाकिस्तान में विदेशी नागरिकों की सुरक्षा और डिजिटल संपत्तियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। एक सीनियर राजनेता के परिवार का नाम आने के बाद अब यह देखना अहम होगा कि कानून इस मामले में कितनी निष्पक्षता से आगे बढ़ता है।

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