पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड ने देशभर में पुरुषों की सुरक्षा और उनके अधिकारों को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। 26 वर्षीय रियल एस्टेट कारोबारी केतन की उनकी मंगेतर सिया गोयल द्वारा रची गई साजिश के बाद अब यह सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या पुरुषों को भी एक विशेष कानूनी सुरक्षा कवच की जरूरत है?
सांसद ने उठाई आयोग की मांग इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए राज्यसभा सांसद अशोक कुमार मित्तल ने राष्ट्रीय पुरुष आयोग के गठन की जोरदार वकालत की है। उन्होंने इस घटना को अत्यंत विचलित करने वाला बताते हुए कहा कि पीड़ितों के साथ न्याय लिंग के आधार पर नहीं होना चाहिए। मित्तल ने केतन के परिवार के लिए निष्पक्ष जांच की मांग की है।
पुराना प्राइवेट मेंबर बिल फिर चर्चा में सांसद मित्तल ने याद दिलाया कि दिसंबर 2025 में उन्होंने संसद में नेशनल कमीशन फॉर मेन बिल पेश किया था। उन्होंने सोशल मीडिया पर उस समय की कार्यवाही का वीडियो साझा करते हुए तर्क दिया कि पुरुष भी अत्याचार के शिकार हो सकते हैं और उन्हें कानूनी सुरक्षा के साथ एक ऐसा मंच चाहिए जहां उनकी बात सुनी जा सके।
आयोग के गठन में क्या हैं अड़चनें? सांसद मित्तल का यह प्रस्ताव प्राइवेट मेंबर बिल के दायरे में आता है। संसदीय इतिहास पर नजर डालें तो ऐसे बिलों का कानून बनना बेहद कठिन होता है। आजादी के बाद से अब तक केवल 14 प्राइवेट बिल ही कानून का रूप ले सके हैं, और 1970 के बाद से तो संसद के दोनों सदनों से ऐसा कोई बिल पारित ही नहीं हो पाया है।
क्या भविष्य में बदलेगी स्थिति? भले ही तकनीकी रूप से प्राइवेट बिल का कानून बनना मुश्किल है, लेकिन केतन अग्रवाल जैसे मामलों ने जनमानस में यह संदेश जरूर दिया है कि समान सुरक्षा का अधिकार सिर्फ एक तरफा नहीं हो सकता। अब देखना यह है कि क्या यह मांग महज एक चर्चा बनकर रह जाएगी या सरकार इसे किसी ठोस नीति के रूप में गंभीरता से लेगी।
*Pune Ketan Agarwal case is deeply disturbing. Ketan and his family deserve a fair, thorough, and impartial investigation, and above all, justice.
— Ashok Kumar Mittal (@DrAshokKMittal) July 3, 2026
I introduced the National Commission for Men Bill in Parliament. Every victim deserves justice, support, and equal protection under… pic.twitter.com/M6ENpG1T7F
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