पंडवानी की कोकिला तीजन बाई का निधन, राजकीय सम्मान के साथ होगा अंतिम संस्कार
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लोक कला और संस्कृति की दुनिया के लिए आज एक अत्यंत दुखद दिन है। विख्यात पंडवानी गायिका और पद्म विभूषण तीजन बाई अब हमारे बीच नहीं रहीं। 70 वर्ष की आयु में रायपुर के एम्स में उन्होंने अंतिम सांस ली। वे लंबे समय से अस्वस्थ चल रही थीं।

सीएम साय ने की राजकीय सम्मान की घोषणा छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि तीजन बाई छत्तीसगढ़ का गौरव और पहचान थीं। उनके सम्मान में राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि उनका अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने ईश्वर से उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की है।

पीएम मोदी और राजनाथ सिंह ने जताया दुख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया के जरिए अपनी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि तीजन बाई का जाना कला जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने लिखा, उन्होंने छत्तीसगढ़ की लोक कला को अपनी भव्य प्रस्तुति से दुनियाभर में विशिष्ट पहचान दिलाई। वहीं, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी उनके निधन को संगीत जगत के लिए एक बड़ी रिक्तता बताया।

महाभारत को मंच पर जीवंत करने वाली आवाज़ तीजन बाई का जन्म 1956 में भिलाई के पास गनियारी गांव में हुआ था। उन्होंने पांडवों की गाथा पंडवानी को न केवल संरक्षित किया, बल्कि उसे अभिनय और गायन के जरिए नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। वे पंडवानी की ऐसी पुरोधा थीं, जिन्होंने महाभारत की कहानियों को आम लोगों के दिल के करीब ला दिया था।

असाधारण उपलब्धियों से भरा सफर कला के क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों से नवाजा था। उन्हें 1988 में पद्मश्री, 2003 में पद्म भूषण और 2019 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था। इसके अलावा उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार जैसे कई प्रतिष्ठित वैश्विक और राष्ट्रीय सम्मान भी प्राप्त हुए थे। उनका जाना भारतीय लोक कला के एक स्वर्णिम अध्याय का अंत है।

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