केतन अग्रवाल केस: पोते की मौत का गम नहीं सह सके दादा, 17 दिन बाद दुनिया को कहा अलविदा
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पुणे के लोहगढ़ किले से गिरकर हुई 25 साल के केतन अग्रवाल की रहस्यमयी मौत के मामले में एक और दुखद मोड़ आ गया है। इस घटना के 17 दिन बाद, शनिवार रात 9:45 बजे केतन के 71 वर्षीय दादा देवीचंद अग्रवाल का निधन हो गया। परिवार का दावा है कि केतन को खोने का सदमा उनके दादा बर्दाश्त नहीं कर पाए।

मेरे बुढ़ापे का सहारा चला गया पोते की मौत के बाद से ही देवीचंद अग्रवाल की तबीयत लगातार बिगड़ रही थी। 27 जून को केतन के लिए निकाले गए कैंडल मार्च में वे व्हीलचेयर पर शामिल हुए थे। उस दौरान उन्होंने फूट-फूटकर रोते हुए कहा था, मेरे बुढ़ापे का सहारा चला गया... अब मैं किसके लिए जिऊंगा? उनकी यह भावुक अपील पूरे देश में चर्चा का विषय बनी थी।

35 साल पुराना भरोसा और खौफनाक धोखा देवीचंद अग्रवाल ने अपनी मौत से पहले एक बड़ा खुलासा किया था। उन्होंने बताया था कि वे मंगेतर सिया गोयल के परिवार को 35 सालों से जानते थे। उन्होंने आरोप लगाया कि सिया के परिवार ने सब कुछ जानते हुए भी इस शादी के लिए उन पर दबाव बनाया। उनका कहना था कि जिन लोगों पर दशकों से भरोसा था, उन्हीं ने उनके घर का चिराग बुझा दिया।

साजिश का डेमो : मैदान में हुई थी हत्या की रिहर्सल जांच में सामने आया है कि 18 जून को लोहगढ़ किले पर केतन की मौत कोई हादसा नहीं, बल्कि एक सोची-समझी साजिश थी। पुलिस रिमांड के दौरान मुख्य आरोपी सिया गोयल ने खुलासा किया कि उसने और उसके प्रेमी चेतन चौधरी ने केतन को ठिकाने लगाने से पहले पुणे के लुल्ला नगर के एक मैदान में हत्या की पूरी रिहर्सल (Crime Re-enactment) की थी।

न्याय की आस में दो जिंदगियां खत्म केतन की मौत के बाद से ही दादा देवीचंद अग्रवाल आरोपियों के लिए फांसी की सजा की मांग कर रहे थे। उनका निधन परिवार के लिए दोहरा वज्रपात है। हालांकि, अब पुलिस सिया गोयल और चेतन चौधरी के खिलाफ ठोस सबूत जुटाने की प्रक्रिया तेज़ कर चुकी है। एक तरफ जहां पुलिस की जांच जारी है, वहीं दूसरी तरफ अग्रवाल परिवार अब अपनों को खोने के गहरे सदमे और न्याय मिलने की कश्मकश के बीच खड़ा है।

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