सुलतानगंज के सरकारी स्कूलों में रटने का दौर खत्म, अब बच्चों के सीखने का अंदाज होगा जुदा
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सुलतानगंज (भागलपुर): बिहार के सरकारी स्कूलों में अब पढ़ाई का तरीका पूरी तरह बदलने वाला है। मिशन निपुण बिहार के तहत अब बच्चों को केवल किताबें रटाने के बजाय उन्हें सोचने, सवाल पूछने और व्यवहारिक रूप से सीखने के लिए तैयार किया जा रहा है। इसी बदलाव की कड़ी में सुलतानगंज के कृष्णानंद सूर्यमल इंटरस्तरीय मॉडल स्कूल में ब्लॉक स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई।

रटने की आदत पर लगाम, समझ पर जोर

परंपरागत रूप से सरकारी स्कूलों में रटकर पढ़ाई करने की संस्कृति हावी रही है, जिससे बच्चों की तार्किक क्षमता प्रभावित होती है। प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी तनु कुमारी ने स्पष्ट किया कि नई शिक्षा व्यवस्था का लक्ष्य केवल कोर्स पूरा करना नहीं, बल्कि बच्चों में विश्लेषण क्षमता, संवाद कौशल और नेतृत्व के गुण विकसित करना है। हर बच्चे को उसकी सीखने की व्यक्तिगत गति के अनुसार आगे बढ़ने का मौका दिया जाएगा।

पीयर लर्निंग से बदलेगी कक्षा की तस्वीर

कार्यशाला में पीयर लर्निंग (सहपाठी शिक्षण) मॉडल पर विशेष ध्यान दिया गया। इस पद्धति में बच्चे अपने ही सहपाठियों से सीखते हैं। जब एक छात्र दूसरे को कोई विषय समझाता है, तो दोनों की अवधारणाएं अधिक स्पष्ट होती हैं। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इससे बच्चों में आत्मविश्वास, टीमवर्क की भावना और कक्षा में सक्रियता बढ़ेगी।

किताबी ज्ञान से आगे: प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग

अब विज्ञान, गणित और भाषा जैसे विषयों को केवल किताबों तक सीमित नहीं रखा जाएगा। प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग के जरिए बच्चों को स्थानीय संसाधनों और दैनिक जीवन की समस्याओं के जरिए सिखाया जाएगा। इससे उनमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण और समस्या सुलझाने की क्षमता विकसित होगी। इनवॉल्व लर्निंग सॉल्यूशन फाउंडेशन के विशेषज्ञों ने शिक्षकों को गतिविधियों के माध्यम से पढ़ो, समझो, करो और सीखो की संस्कृति अपनाने के टिप्स दिए।

शिक्षकों के लिए स्पष्ट निर्देश

प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी ने शिक्षकों को निर्देश दिए हैं कि वे नियमित अंतराल पर बच्चों के सीखने के स्तर का आकलन करें। जिन बच्चों को पढ़ाई में कठिनाई हो रही है, उनके लिए विशेष सुधारात्मक कक्षाएं चलाई जाएं। कक्षा का वातावरण ऐसा होना चाहिए जहां बच्चा बिना किसी संकोच के सवाल पूछ सके।

एक नई उम्मीद

कार्यशाला के अंत में मेंटर शिक्षकों ने अपने-अपने स्कूलों में बदलाव लाने का संकल्प लिया। शिक्षा विभाग का मानना है कि रटने की संस्कृति खत्म होने से मिशन निपुण बिहार के तहत बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान का लक्ष्य जल्द ही प्राप्त कर लिया जाएगा। यह पहल राज्य के सरकारी विद्यालयों में एक आनंददायक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का माहौल तैयार करने में मील का पत्थर साबित हो सकती है।

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