क्या कांग्रेस छोड़ेंगे मनीष तिवारी? पार्टी लाइन के खिलाफ जाकर पाकिस्तान पर ली सख्त स्टैंड
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पंजाब में कांग्रेस के नए संगठनात्मक ढांचे के ऐलान के साथ ही पार्टी के भीतर भूचाल आ गया है। चंडीगढ़ से सांसद और वरिष्ठ नेता मनीष तिवारी को पंजाब कांग्रेस की सभी महत्वपूर्ण चुनावी समितियों से बाहर कर दिया गया है। इस कदम को 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी के बदलते पावर स्ट्रक्चर के तौर पर देखा जा रहा है।

अहम भूमिकाओं से बाहर किए गए तिवारी बुधवार को घोषित बदलावों में अमरिंदर सिंह राजा वारिंग को पंजाब कांग्रेस का अध्यक्ष और प्रताप सिंह बाजवा को विपक्ष का नेता बरकरार रखा गया है। चरणजीत सिंह चन्नी को कैंपेन कमेटी का चेयरमैन बनाया गया है। हालांकि, तीन बार के सांसद मनीष तिवारी का नाम इन प्रमुख सूचियों से गायब है, जो उनके पार्टी में भविष्य को लेकर कई सवाल खड़े कर रहा है।

सोशल मीडिया पर छलका दर्द लिस्ट जारी होने के बाद मनीष तिवारी ने सोशल मीडिया पर तंज भरे अंदाज में लिखा, जो होगा, होगा। इसके बाद उन्होंने एक और पोस्ट में कहा, काश लोगों और संस्थाओं की इनसिक्योरिटी का कोई इलाज होता। हालांकि उन्होंने सीधे नेतृत्व का नाम नहीं लिया, लेकिन उनकी यह नाराजगी साफ तौर पर पार्टी से उन्हें दरकिनार किए जाने के जवाब में देखी जा रही है।

आतंकवाद पर अपनी ही पार्टी से अलग राय संगठन से बाहर होने के साथ ही मनीष तिवारी के तेवर भी बदले हुए नजर आ रहे हैं। कश्मीर में हुए आतंकी हमलों के बाद जब विपक्ष के कई धड़े पाकिस्तान से बातचीत की बात कर रहे हैं, तब तिवारी ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि पाकिस्तान जब तक आतंकवाद को पूरी तरह बंद नहीं करता, तब तक उसके साथ किसी भी तरह की बातचीत का कोई औचित्य नहीं है।

केंद्र सरकार की नीति के करीब मनीष तिवारी तिवारी का यह बयान कांग्रेस के पारंपरिक स्टैंड से काफी अलग और केंद्र सरकार की नो टॉक विद टेरर नीति के करीब दिखाई देता है। पूर्व केंद्रीय मंत्री का यह मुखर रुख संकेत दे रहा है कि वे पार्टी के वर्तमान नेतृत्व और नीतियों से असहज महसूस कर रहे हैं।

क्या बगावत की ओर बढ़ रहे हैं कदम? राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि क्या मनीष तिवारी जल्द ही कोई बड़ा चौंकाने वाला फैसला ले सकते हैं? पंजाब में कांग्रेस 2027 की लड़ाई के लिए एकजुट होने का दावा कर रही है, लेकिन एक दिग्गज नेता का इस तरह नाराज होना और राष्ट्रीय मुद्दों पर पार्टी लाइन से अलग स्टैंड लेना पार्टी के लिए एक नई मुसीबत बन सकता है। आने वाले दिन ही तय करेंगे कि हाथ के साथ तिवारी का रिश्ता और कितना लंबा चलेगा।

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