अतिथि देवो भव की मिसाल: ट्रंप के तंज से आहत ताकाइची को भारत ने दी आत्मीयता की गर्माहट
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जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची इस समय तीन दिवसीय भारत यात्रा पर हैं। नई दिल्ली में उनका भव्य स्वागत हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें बहन कहकर संबोधित किया, जो दोनों देशों के बीच की प्रगाढ़ कूटनीतिक और मानवीय बॉन्डिंग को दर्शाता है। यह स्वागत उस वाकये से बिल्कुल उलट है, जिसका सामना ताकाइची को अमेरिका में करना पड़ा था।

ट्रंप की असहज कर देने वाली टिप्पणी मार्च 2026 में अपनी अमेरिका यात्रा के दौरान, जापान की प्रधानमंत्री ताकाइची को व्हाइट हाउस में एक कूटनीतिक झटके का सामना करना पड़ा था। ईरान और वैश्विक सुरक्षा पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान, जब एक जापानी पत्रकार ने ट्रंप से पूछा कि ईरान पर हमले से पहले सहयोगियों को जानकारी क्यों नहीं दी गई, तो ट्रंप ने बेहद विवादास्पद तंज कसा।

ट्रंप ने मुस्कुराते हुए कहा, आपने भी तो पर्ल हार्बर के हमले से पहले हमें नहीं बताया था। अचानक हमले के बारे में जापान से बेहतर कौन जानता है? ट्रंप की इस हाजिरजवाबी ने वहां मौजूद सभी लोगों को स्तब्ध कर दिया था और खुद प्रधानमंत्री ताकाइची भी क्षण भर के लिए हैरान रह गई थीं।

इतिहास के जख्मों पर तंज 7 दिसंबर 1941 को जापान द्वारा पर्ल हार्बर पर किए गए उस हमले में अमेरिका के 2400 जवान मारे गए थे। इसी घटना के बाद अमेरिका ने हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराए थे, जिसने पूरी दुनिया को झकझोर दिया था। ट्रंप का उस पुरानी घटना को कूटनीतिक मंच पर कुरेदना विश्व नेताओं के लिए हमेशा से एक पहेली और असहज करने वाला अनुभव रहा है।

भारत और अमेरिका के रवैये में अंतर ट्रंप का व्यवहार अक्सर कूटनीतिक शिष्टाचार से परे होता है। वे कभी प्रधानमंत्री मोदी को मित्र बताते हैं, तो कभी भारत पर व्यापारिक दबाव बनाते हैं। हालांकि, भारत ने हमेशा अतिथि देवो भव की परंपरा निभाई है। जहां अमेरिका अपने सहयोगियों को भी नीचा दिखाने से नहीं चूकता, वहीं भारत ने ताकाइची का जिस गर्मजोशी से स्वागत किया, वह भारत की बढ़ती वैश्विक साख और कूटनीतिक परिपक्वता को दर्शाता है।

स्वतंत्र विदेश नीति का संदेश प्रधानमंत्री मोदी का रुख स्पष्ट है—वे अमेरिका के दबाव या नाराजगी की परवाह किए बिना रूस समेत अन्य देशों के साथ भारत के संबंधों को प्राथमिकता देते हैं। ताकाइची का भारत दौरा यह संदेश दे रहा है कि भारत ऐसी वैश्विक शक्ति बन रहा है जो अपने सहयोगियों को सम्मान देना जानता है, न कि उन्हें ट्रंप की तरह बार-बार पुराने जख्म याद दिलाकर अपमानित करना।

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