विजया मेहता: भारतीय रंगमंच की वो ध्रुव तारा , जिसने नाना पाटेकर जैसे दिग्गजों को गढ़ा
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भारतीय कला जगत के लिए एक युग का अंत हो गया है। आधुनिक मराठी थिएटर की नींव रखने वालीं और सिनेमा की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाने वाली प्रख्यात डायरेक्टर, एक्ट्रेस और प्रोड्यूसर विजया मेहता का 91 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। रंगमंच की दुनिया में बाई के नाम से मशहूर इस दिग्गज ने अपने मुंबई स्थित आवास पर अंतिम सांस ली।

कौन थीं विजया मेहता?

4 नवंबर 1934 को बड़ौदा में जन्मीं विजया मेहता का जीवन कला को समर्पित था। मुंबई यूनिवर्सिटी से पढ़ाई के बाद उन्होंने इब्राहिम अल्काज़ी और आदि मर्ज़बान जैसे दिग्गजों से अभिनय की बारीकियां सीखीं। उम्र से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के चलते उनका निधन हुआ है, लेकिन उन्होंने अपने पीछे जो विरासत छोड़ी है, वह आने वाली कई पीढ़ियों का मार्गदर्शन करती रहेगी।

रंगायन और थिएटर में क्रांति

1960 के दशक में जब भारतीय थिएटर एक बदलाव की ओर देख रहा था, तब विजया मेहता ने विजय तेंदुलकर, डॉ. श्रीराम लागू और अरविंद देशपांडे के साथ मिलकर ऐतिहासिक थिएटर ग्रुप रंगायन की स्थापना की। यह मंच प्रयोगधर्मी और पैरेलल थिएटर का केंद्र बना, जिसने मराठी रंगमंच को विश्व स्तर पर पहचान दिलाई।

नाना पाटेकर को दिया सोना बनने का हुनर

विजया मेहता का नाम अक्सर नाना पाटेकर के साथ सम्मान से लिया जाता है। नाना को तराशने का काम बाई ने ही किया था। हमीदाबाईची कोठी जैसे नाटकों में उन्हें निर्देशित कर उन्होंने नाना को किरदार में डूबना सिखाया। नाना पाटेकर उन्हें अपना सबसे बड़ा गुरु मानते थे और पिछले साल उनके 90वें जन्मदिन पर भी वे खास तौर पर उनसे मिलने पहुंचे थे।

सितारों की बनाई पाठशाला

उनकी मेंटरशिप का लोहा सिर्फ नाना पाटेकर ही नहीं, बल्कि अनुपम खेर, नीना कुलकर्णी, विक्रम गोखले और भारती आचरेकर जैसे तमाम दिग्गज मानते हैं। अनुपम खेर ने उनके निधन पर शोक जताते हुए उन्हें भारतीय रंगमंच का सबसे बेहतरीन मस्तिष्क बताया। अभिनय के क्षेत्र में पार्टी और कलयुग जैसी फिल्मों में उनकी अदाकारी हमेशा याद की जाएगी।

मराठी सिनेमा के लिए एक और बड़ा आघात

विजया मेहता का निधन मराठी फिल्म जगत के लिए एक और गहरा घाव है। हाल के कुछ वर्षों में इंडस्ट्री ने विजय कदम और विक्रम गोखले जैसे दिग्गज कलाकारों को खोया है। विक्रम गोखले ने अपनी अंतिम फिल्म गोदावरी के जरिए अपनी अभिनय क्षमता का परिचय दिया था। अब विजया मेहता के जाने से मराठी रंगमंच और सिनेमा की एक पूरी स्वर्णिम पीढ़ी मानो इतिहास के पन्नों में सिमट गई है। कला जगत आज उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दे रहा है।

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