पीएम मोदी का मिशन गवर्नेंस : सचिवों के साथ 4 घंटे की महाबैठक में तय हुआ भविष्य का रोडमैप
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नई दिल्ली: केंद्रीय कैबिनेट में संभावित फेरबदल की चर्चाओं के बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को सभी मंत्रालयों और विभागों के सचिवों के साथ एक उच्च-स्तरीय बैठक की। सेवा तीर्थ में आयोजित यह मैराथन बैठक करीब चार घंटे तक चली, जिसमें प्रशासनिक सुधारों और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया गया।

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और डिजिटल गवर्नेंस पर जोर बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और ईज ऑफ लिविंग को बढ़ावा देना था। प्रधानमंत्री ने सरकारी नियमों को सरल बनाने और डिजिटल गवर्नेंस को अधिक पारदर्शी बनाने पर चर्चा की। सचिवों ने अपने-अपने विभागों की चुनौतियों और सुधारों की प्रगति का विस्तृत ब्यौरा पीएम के समक्ष पेश किया।

होल-ऑफ-गवर्नमेंट अप्रोच की वकालत प्रधानमंत्री मोदी ने मंत्रालयों को अपनी विभागीय सीमाओं (Silos) से बाहर निकलने का निर्देश दिया। उन्होंने होल-ऑफ-गवर्नमेंट दृष्टिकोण अपनाने पर जोर देते हुए कहा कि एकीकृत योजना ही देश के विकास की असली कुंजी है। इस दौरान पीएम गतिशक्ति प्लेटफॉर्म के और अधिक प्रभावी उपयोग पर बल दिया गया ताकि विभिन्न मंत्रालयों के बीच तालमेल और निर्णय लेने की गति बढ़ सके।

जन-सरोकार ही योजनाओं का पैमाना पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि किसी भी योजना की सफलता कागजी कार्रवाई से नहीं, बल्कि आम नागरिकों के जीवन में आए सकारात्मक बदलाव से तय होगी। उन्होंने अधिकारियों से परिणाम-केंद्रित (Result-oriented) रुख अपनाने और समयबद्ध तरीके से लक्ष्यों को पूरा करने की हिदायत दी। उन्होंने जोर दिया कि योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना अनिवार्य है।

2026 की रणनीति और प्रशासनिक सुधार यह बैठक वर्ष 2026 की दूसरी छमाही के लिए सरकार की प्राथमिकताओं का संकेत है। हाल ही में शुरू की गई 52 सप्ताह में 52 सुधार जैसी पहलों को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। सरकार का लक्ष्य प्रशासनिक दक्षता को एक नए स्तर पर ले जाना है, जिससे आम जनता को सरकारी सेवाओं का लाभ बिना किसी देरी के मिल सके।

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