वॉट्सऐप ने अपने अरबों यूजर्स के लिए एक बड़ा बदलाव पेश किया है। अब यूजर्स को किसी से बात करने के लिए अपना मोबाइल नंबर साझा करने की जरूरत नहीं होगी, वे सिर्फ यूजरनेम के जरिए चैट कर सकेंगे। इसे डिजिटल प्राइवेसी में एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है, लेकिन भारत जैसे देश में इसे लेकर सुरक्षा विशेषज्ञों की चिंताएं भी बढ़ गई हैं।
सीनियर IPS अधिकारी अरुण बोथरा ने इस फीचर पर कड़ी आपत्ति जताई है। उनका मानना है कि यूजरनेम-आधारित पहचान कानून प्रवर्तन एजेंसियों (Law Enforcement Agencies) के काम को बेहद मुश्किल बना देगी। टेलीग्राम का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वहां भी इसी तरह के फीचर की वजह से इन्वेस्टमेंट स्कैम और पहचान बदलकर धोखाधड़ी करने के मामले बढ़े हैं। वॉट्सऐप का दायरा टेलीग्राम से कहीं बड़ा है, इसलिए यहां सुरक्षा में थोड़ी सी भी चूक गंभीर परिणाम ला सकती है।
बहस का एक दूसरा पहलू भी है। कुछ जानकारों का तर्क है कि मोबाइल नंबर छिप जाने से आम यूजर्स अधिक सुरक्षित महसूस करेंगे। इससे स्कैमर्स के लिए किसी को ट्रैक करना या नंबर के आधार पर उसे हैक करना मुश्किल हो जाएगा, जिससे डिजिटल अरेस्ट जैसे डरावने साइबर अपराधों में कमी आ सकती है।
जाने-माने एंटरप्रेन्योर अंकुर वारिकू ने इसे लेकर गंभीर चेतावनी दी है। उनका कहना है कि भारत में डिजिटल साक्षरता अभी भी कम है। स्कैमर्स एक ही नाम से मिलते-जुलते कई यूजरनेम (जैसे ankurwarikoo, awarikoo) बनाकर लोगों को ठग सकते हैं। चूंकि यूजरनेम आने के बाद कोई फोन नंबर के जरिए वेरिफाई नहीं कर पाएगा कि सामने वाला असली है या नकली, इसलिए धोखाधड़ी बढ़ सकती है।
सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि एक्स और टेलीग्राम पर भी तो यूजरनेम होता है, तो वॉट्सऐप पर हंगामा क्यों? इसका जवाब देते हुए विशेषज्ञों का कहना है कि समस्या स्केल यानी उपयोगकर्ताओं की संख्या की है। भारत में वॉट्सऐप के 85 करोड़ से ज्यादा यूजर्स हैं। इतनी बड़ी आबादी के बीच पहचान छिपाने का फीचर स्कैमर्स के लिए एक बड़ा मौका साबित हो सकता है।
कुछ विशेषज्ञों ने यूजरनेम की (Username Key) का सुझाव दिया है, जिसमें 4 अंकों का कोड डालने पर ही चैट की जा सकेगी। हालांकि, आलोचकों का तर्क है कि यह फीचर केवल अनजान लोगों को रोकने के लिए है, उन स्कैमर्स के लिए नहीं जो खुद को असली बताकर आपको अपने जाल में फंसाना चाहते हैं।
फिलहाल, इस फीचर के दुरुपयोग को रोकने के लिए वॉट्सऐप ने अभी तक किसी ठोस एंटी-एब्यूज सिस्टम की जानकारी नहीं दी है। प्राइवेसी और सुरक्षा के बीच एक महीन लकीर है, और यह देखना दिलचस्प होगा कि वॉट्सऐप इस बदलाव को कितना सुरक्षित बना पाता है।
The username-based identity feature of WhatsApp may emerge as a major challenge for law enforcement agencies. With a similar feature, Telegram has often figured in investigations involving investment scams, impersonation and cybercrime.#WhatsApp is much bigger. At the… pic.twitter.com/N3LQV66LVr
— Arun Bothra 🇮🇳 (@arunbothra) June 30, 2026
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