अखिलेश के सामने शर्ट के बटन खोल समर्थक ने दिखाया डिंपल यादव का टैटू, वायरल वीडियो ने बढ़ाई सियासी हलचल
News Image

उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव की बिसात बिछनी शुरू हो गई है। इसी बीच, आजमगढ़ का एक वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र बना हुआ है। इसमें समाजवादी पार्टी के एक समर्थक ने पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के सामने कुछ ऐसा किया, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया।

अखिलेश के सामने समर्थक की जिद आजमगढ़ में एक शादी समारोह के दौरान अखिलेश यादव पहुंचे थे। वहां जैसे ही वे समर्थकों के बीच आए, एक कार्यकर्ता भीड़ से आगे निकला और अपनी शर्ट के बटन खोल दिए। उसने अपने सीने पर मैनपुरी सांसद डिंपल यादव का टैटू बनवा रखा था। समर्थक ने अखिलेश से जिद करते हुए कहा, भैया, आपने भाभी मां से मिलवाने का वादा किया था, अब कब मिलवा रहे हैं?

मुस्कुराकर आगे बढ़े अखिलेश अखिलेश यादव ने इस स्थिति को बेहद सहजता से संभाला। वे समर्थक की बात सुनकर मुस्कुराए और संक्षिप्त बातचीत की। सपा सूत्रों का कहना है कि अखिलेश अपने कार्यकर्ताओं के ऐसे भावनात्मक जुड़ाव के प्रति हमेशा संजीदा रहते हैं। हालांकि, विपक्ष इसे अंधभक्ति और परिवारवाद का नया उदाहरण बताकर तंज कस रहा है।

आजमगढ़: सपा का सियासी किला यह घटना सपा के गढ़ माने जाने वाले आजमगढ़ में हुई। आजमगढ़ न केवल पूर्वांचल की राजनीति का पावर सेंटर है, बल्कि यह समाजवादी विचारधारा की प्रयोगशाला भी है। मुलायम सिंह यादव से लेकर अखिलेश यादव तक, इस सीट ने पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है। 2024 लोकसभा चुनाव में धर्मेंद्र यादव की जीत के बाद यहां सपा का हौसला और बुलंद है।

जातीय समीकरण और सपा की पकड़ आजमगढ़ में समाजवादी पार्टी की पकड़ का सबसे बड़ा आधार MY (मुस्लिम-यादव) समीकरण है। विश्लेषणों के मुताबिक, यहां यादव (लगभग 20%) और मुस्लिम (लगभग 18%) मतदाताओं का बड़ा हिस्सा सपा के साथ मजबूती से खड़ा रहता है। यही कारण है कि स्थानीय स्तर पर अखिलेश यादव और उनके परिवार के प्रति समर्थकों में दीवानगी अक्सर देखने को मिलती है।

सियासी मायने क्या हैं? भले ही यह वीडियो एक समर्थक का व्यक्तिगत जज्बा लग रहा हो, लेकिन यूपी की सियासत में प्रतीकवाद का महत्व बहुत है। विधानसभा चुनाव 2027 के नजदीक आते ही अखिलेश यादव का अपनी पत्नी डिंपल यादव के साथ राजनीतिक सक्रियता बढ़ाना और समर्थकों का इस तरह का जुनून यह दर्शाता है कि सपा के लिए यादव परिवार केवल नेता नहीं, बल्कि एक भावनात्मक ब्रांड भी है। अब देखना होगा कि क्या यह भावनात्मक जुड़ाव चुनावी नतीजों में उसी तरह तब्दील हो पाएगा।

*

कुछ अन्य वेब स्टोरीज

Story 1

अखिलेश के सामने शर्ट के बटन खोल समर्थक ने दिखाया डिंपल यादव का टैटू, वायरल वीडियो ने बढ़ाई सियासी हलचल

Story 1

मानसून का महाअलर्ट: अगले 15 घंटों में दिल्ली-यूपी समेत 17 राज्यों में भारी बारिश और आंधी का तांडव

Story 1

देश को तोड़ना चाहते हैं ये वायरस और कॉकरोच : नितिन नबीन का CJP पर बड़ा हमला

Story 1

मानवता शर्मसार: लावारिस शव को कचरा ढोने वाली गाड़ी में ले जाने पर मचा बवाल

Story 1

दीपों की दिव्य आभा से अलौकिक हुआ उत्तरवाहिनी गंगा तट, उमड़ा आस्था का सैलाब

Story 1

सहरसा सदर अस्पताल का मंगलवार का रोस्टर: OPD जाने से पहले चेक करें अपने डॉक्टर का नाम

Story 1

13 हजार की सैलरी, खाते में आए सिर्फ 3800 रुपये: जवाब मांगने गए कर्मचारी को HR ने कहा- बाहर निकलो

Story 1

लॉकअप 2: क्या हर्षद चोपड़ा और शिवांगी जोशी के बीच शुरू हुई नजदीकियां? कंटेस्टेंट के खुलासे से मचा बवाल

Story 1

FIFA WC 2026: जर्मनी का सफर खत्म, अपना सब कुछ बेचने वाला हीरो बना पैराग्वे की जीत का सारथी

Story 1

PoK में खूनी खेल: पाकिस्तानी सेना ने ड्रोन से बरसाए बम, प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाने की साजिश