मुंबई: बॉलीवुड अभिनेता सुनील शेट्टी हाल ही में अपनी नन्हीं नातिन को लेकर दिए गए एक बयान के कारण विवादों के घेरे में हैं। एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने अपनी नातिन की एक मासूम हरकत साझा की, जिसके बाद सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
क्या है पूरा मामला? सुनील शेट्टी ने भावुक होते हुए बताया कि उनकी नातिन सुबह उठकर सबसे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर को ढूंढती है। उन्होंने कहा कि बच्ची घर में रखी एक किताब में पीएम मोदी की तस्वीर को देखकर खुश होती है और उन्हें गणपति बप्पा के पास रखे लड्डू खिलाने की कोशिश करती है। सुनील शेट्टी ने स्पष्ट किया कि यह बच्ची का स्वतःस्फूर्त व्यवहार है, जिसे किसी ने सिखाया नहीं है।
सोशल मीडिया पर विषवमन अभिनेता ने इस वाकये को एक नाना के रूप में गर्व और ममता के साथ साझा किया था। हालांकि, सोशल मीडिया का एक धड़ा इस पर भड़क गया। पिछले 50 घंटों से इंटरनेट पर उन्हें लगातार ट्रोल किया जा रहा है। यूजर्स ने उन्हें चाटुकार और थर्ड ग्रेड एक्टर जैसे अपमानजनक शब्दों से संबोधित किया है। कुछ लोगों ने तो यहाँ तक आरोप लगा दिया कि सुनील शेट्टी राज्यसभा सीट पाने के लिए अपनी नातिन का इस्तेमाल कर रहे हैं।
कांग्रेस की तल्ख टिप्पणी इस विवाद में राजनीति भी कूद पड़ी है। कांग्रेस की केरल इकाई ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से सुनील शेट्टी पर तीखा हमला बोला है। पार्टी ने इसे पद्म पुरस्कार पाने की स्तरहीन चापलूसी करार दिया है। दिलचस्प बात यह है कि 2005 में इसी पार्टी की यूथ विंग ने सुनील शेट्टी को राजीव गांधी राष्ट्रीय गुणवत्ता पुरस्कार से सम्मानित किया था, लेकिन आज वही दल उन पर निशाना साध रहा है।
विवादों से परे: एक नेक दिल इंसान की छवि एक अभिनेता होने के इतर सुनील शेट्टी की छवि फिल्म इंडस्ट्री में एक मददगार इंसान की रही है। वे पिछले 35 वर्षों से विपला फाउंडेशन के माध्यम से वंचित बच्चों की शिक्षा के लिए काम कर रहे हैं। 1998 में उन्होंने मानव तस्करी के शिकार 128 लोगों को छुड़ाने में गुप्त रूप से बड़ी भूमिका निभाई थी। कोरोना काल में भी उन्होंने जरूरतमंदों और मुंबई के डब्बावालों की मदद के लिए हाथ आगे बढ़ाए थे।
कलाकारों का संकटमोचक फिल्म इंडस्ट्री के कई सितारे सुनील शेट्टी की दरियादिली के गवाह हैं। सलमान खान हों, जैकी श्रॉफ या रवि किशन—कई अभिनेताओं ने सार्वजनिक रूप से स्वीकारा है कि संघर्ष के दिनों में सुनील शेट्टी ने उन्हें आर्थिक सहारा दिया। सेट पर काम करने वाले छोटे कर्मचारियों की पढ़ाई और स्वास्थ्य का खर्च उठाना उनके स्वभाव का हिस्सा रहा है।
बहरहाल, एक मासूम बच्ची की निश्छल क्रिया को जिस तरह से राजनीतिक चश्मे से देखा जा रहा है, वह समाज में बढ़ती संवेदनहीनता को दर्शाता है। एक तरफ जहाँ लोग अभिनेता के उदार व्यक्तित्व को जानते हैं, वहीं दूसरी तरफ इस विवाद ने यह साबित कर दिया है कि आज के दौर में निजी भावनाएं भी राजनीति का निशाना बन सकती हैं।
Padma grade sycophancy.
— Congress Kerala (@INCKerala) June 27, 2026
Most of his contemporaries got Padma awards. The only option left is this. pic.twitter.com/GLpvtW03Ep
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