अखिलेश के सामने पैर रखकर बैठे रेवती रमण सिंह: क्या ये सम्मान या अपमान? जानें तस्वीर के पीछे का पूरा सच
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समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव और वरिष्ठ नेता कुंवर रेवती रमण सिंह की एक मुलाकात की तस्वीर सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है। प्रयागराज में हुई इस मुलाकात के दौरान रेवती रमण सिंह का बैठने का अंदाज देख लोग दो गुटों में बंट गए हैं।

तस्वीर पर क्यों छिड़ा विवाद? तस्वीर में रेवती रमण सिंह एक स्टूल पर पैर-पर-पैर चढ़ाकर बैठे हैं, जबकि उनके सामने सोफे पर अखिलेश यादव बैठे दिख रहे हैं। सोशल मीडिया पर एक वर्ग इसे सीधे तौर पर अखिलेश यादव का अपमान मान रहा है। आरोप लगाए जा रहे हैं कि सामंती सोच के कारण उन्होंने ऐसा किया।

क्या है सच्चाई? विवाद बढ़ता देख उनके समर्थकों ने हकीकत सामने रखी है। 82 वर्षीय रेवती रमण सिंह लंबे समय से बीमार हैं। उनके करीबियों के अनुसार, पैर में ऑपरेशन और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के चलते वे पैर नीचे लटकाकर नहीं बैठ सकते। डॉक्टरों की सलाह पर ही वे पैर ऊपर रखकर बैठते हैं। इसे उनकी शारीरिक लाचारी माना जा रहा है, न कि कोई राजनीतिक इशारा।

क्यों सर्च हो रही है रेवती रमण सिंह की जाति? इस विवाद ने सियासी रंग भी ले लिया है। लोग अब रेवती रमण सिंह का इतिहास और उनकी जाति जानने में जुट गए हैं। आपको बता दें कि वे प्रयागराज के मशहूर बराव स्टेट राजघराने से ताल्लुक रखते हैं और भूमिहार ब्राह्मण समुदाय से आते हैं। कुछ लोग इसे अगड़ी और पिछड़ी जाति के समीकरण से जोड़कर टिप्पणी कर रहे हैं।

कौन हैं कुंवर रेवती रमण सिंह? रेवती रमण सिंह उत्तर प्रदेश के कद्दावर नेताओं में से एक हैं। वे समाजवादी पार्टी के संस्थापक सदस्यों में शामिल थे। उन्होंने मुलायम सिंह यादव के साथ मिलकर पार्टी को मजबूती दी थी।

अखिलेश का बड़प्पन या राजनीति? एक तरफ जहां आलोचक इसे प्रोटोकॉल का उल्लंघन बता रहे हैं, वहीं समर्थकों का कहना है कि अखिलेश यादव का वहां जाकर बैठना और बुजुर्ग नेता का हालचाल लेना उनके संस्कार दर्शाता है। रेवती रमण सिंह की शारीरिक स्थिति को जाने बिना इसे राजनीतिक अपमान का रंग देना तार्किक नहीं है। फिलहाल, यह तस्वीर सोशल मीडिया पर बहस का बड़ा केंद्र बनी हुई है।

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