ट्रैफिक जाम से मिलेगी आजादी: 5 मिनट में घर पहुंचेंगी दवाएं, बेंगलुरु का स्टार्टअप बदलने जा रहा भारत की तस्वीर
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सड़कों पर घंटों जाम, फंसी हुई एम्बुलेंस और देरी से पहुंचती दवाइयां—भारत के बड़े शहरों की यह एक आम समस्या है। लेकिन अब इसका समाधान आसमान की ऊंचाइयों में छिपा है। बेंगलुरु का एयरोस्पेस स्टार्टअप एयरबाउंड भारत में ड्रोन डिलीवरी के जरिए लॉजिस्टिक्स की दुनिया में क्रांति लाने के लिए तैयार है।

अमरावती से होगी शुरुआत एयरबाउंड ने आंध्र प्रदेश ड्रोन कॉर्पोरेशन के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता किया है। इस साझेदारी का लक्ष्य अमरावती कैपिटल रीजन में एक विशाल ड्रोन डिलीवरी नेटवर्क स्थापित करना है। कंपनी का लक्ष्य अगले एक साल के भीतर राज्य में हर दिन 10,000 ड्रोन उड़ानें भरने का है, जो इसे दुनिया के सबसे बड़े कमर्शियल ड्रोन नेटवर्कों में से एक बना सकता है।

तीन बड़े शहरों को जोड़ेगा नेटवर्क यह हाई-टेक नेटवर्क आंध्र प्रदेश के गुंटूर से अपनी पहली उड़ान भरेगा। इसके बाद इस सेवा का विस्तार करते हुए इसे अमरावती, विजयवाड़ा और गुंटूर जैसे प्रमुख शहरों के बीच जोड़ा जाएगा। इससे उन दुर्गम या भीड़भाड़ वाले इलाकों में भी तेजी से सामान पहुंचाया जा सकेगा, जहां सामान्य वाहनों का पहुंचना मुश्किल होता है।

हेल्थकेयर पर विशेष फोकस इस प्रोजेक्ट का प्राथमिक लक्ष्य स्वास्थ्य सेवाएं हैं। शुरुआत में इसका उपयोग दवाओं, ब्लड सैंपल और लैब रिपोर्ट्स को अस्पताल से मरीज तक या लैब तक पहुंचाने में किया जाएगा। इसके बाद, इस नेटवर्क को ई-कॉमर्स और अन्य कमर्शियल डिलीवरी के लिए भी खोल दिया जाएगा।

तकनीकी कमाल: हल्का वजन, भारी वजन ढोने की क्षमता एयरबाउंड के ड्रोन सामान्य ड्रोन से काफी अलग हैं। कंपनी ने ब्लेंडेड विंग बॉडी टेलसिटर तकनीक का उपयोग किया है। ये ड्रोन अल्ट्रा-लाइट कार्बन फाइबर से बने हैं, जिनका वजन मात्र 1.5 किलोग्राम है। इनकी खासियत इनका पेलोड रेशियो है; ये अपने वजन से भी ज्यादा भारी सामान (करीब 1.5:1 के अनुपात में) उठाकर 40 मील प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ सकते हैं।

20 गुना सस्ती होगी डिलीवरी सबसे हैरान करने वाली बात इसकी लागत है। कंपनी का दावा है कि पारंपरिक डिलीवरी तरीकों की तुलना में ड्रोन के जरिए सामान पहुंचाना 20 गुना तक सस्ता हो सकता है। एयरबाउंड पहले ही बेंगलुरु में नारायण हेल्थ जैसे अस्पतालों के साथ मिलकर 700 से अधिक सफल मेडिकल डिलीवरी उड़ानें पूरी कर चुका है, जो इस तकनीक की सफलता का पक्का सबूत है।

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