भागलपुर के तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (TMBU) में वर्ष 2025 में हुई 70 अतिथि शिक्षकों की बहाली प्रक्रिया में गंभीर धांधली सामने आई है। शैक्षणिक दस्तावेजों में हेरफेर और आरक्षण नियमों के उल्लंघन के आरोपों के बाद राजभवन ने मामले को गंभीरता से लिया है।
राजभवन के आदेश और प्रभारी कुलपति प्रोफेसर विमलेंदु शेखर झा के निर्देश पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी 70 अतिथि शिक्षकों को तत्काल प्रभाव से सेवामुक्त कर दिया है। साथ ही, मामले की जांच के लिए एक तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया है।
जांच समिति की कमान सीसीडीसी प्रोफेसर सच्चिदानंद पांडेय को सौंपी गई है। उनके साथ पीजी फिजिक्स विभाग के प्रोफेसर कमल प्रसाद और बॉटनी विभाग के प्रोफेसर एच.के. चौरसिया को सदस्य बनाया गया है। इस समिति को एक सप्ताह के भीतर सभी विवादित दस्तावेजों की सूक्ष्म जांच कर विस्तृत रिपोर्ट सौंपनी है। इस कार्रवाई का लक्ष्य उन तत्कालीन पदाधिकारियों की पहचान करना है, जिन्होंने इस नियुक्ति प्रक्रिया में संदिग्ध भूमिका निभाई थी।
आरोप है कि बहाली की पूरी प्रक्रिया विश्वविद्यालय परिसर के बजाय तत्कालीन कुलपति प्रोफेसर जवाहर लाल के आवासीय कार्यालय में गोपनीय ढंग से की गई थी। सूत्रों का दावा है कि अभ्यर्थियों को सादे कागज पर पेंसिल से अंक दिए गए थे, ताकि बाद में उनमें आसानी से काट-छांट या फेरबदल किया जा सके। इसके अलावा, चयन समिति के विशेषज्ञों से पहले ही सादे कागजों पर हस्ताक्षर करवा लिए गए थे।
इस धांधली के खिलाफ डॉ. रंजीत कुमार, डॉ. कृष्ण बिहारी गर्ग समेत दर्जनों पीड़ित अभ्यर्थियों ने मोर्चा खोल रखा था। अभ्यर्थियों का आरोप है कि योग्य उम्मीदवारों को दरकिनार कर भारी रिश्वत के बल पर अयोग्य लोगों को नियुक्तियां दी गईं। शिकायत में यह भी कहा गया है कि आरक्षण रोस्टर के नियमों को पूरी तरह ताक पर रख दिया गया था, जिससे आरक्षित वर्ग के मेधावी उम्मीदवार अपने संवैधानिक अधिकारों से वंचित रह गए।
विश्वविद्यालय प्रशासन की इस कार्रवाई से उन तत्कालीन अधिकारियों और कर्मचारियों में हड़कंप मच गया है, जिन्होंने इस पूरी प्रक्रिया को अंजाम दिया था। अब सबकी निगाहें जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी हैं।
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— Prabhat Khabar (@prabhatkhabar) June 24, 2026
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