भारत के तीन किशोरों का कमाल: इमली के बीज से बनाया माइक्रोप्लास्टिक का तोड़, जीता दुनिया का सबसे बड़ा पर्यावरण पुरस्कार
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दुनिया भर में बढ़ते माइक्रोप्लास्टिक के खतरे के बीच भारत के तीन 16 वर्षीय छात्रों—अव्याना मेहता, एरियाना अग्रवाल और विवान छावछरिया—ने इतिहास रच दिया है। इन किशोरों ने अपने अभिनव आविष्कार Plas-Stick के लिए विश्व का सबसे प्रतिष्ठित द अर्थ प्राइज (The Earth Prize) जीतकर देश का नाम रोशन किया है।

यह पहली बार है जब भारतीय छात्रों की किसी टीम ने यह वैश्विक उपलब्धि हासिल की है। 29 मई को जिनेवा में आयोजित समारोह में, दुनिया भर से आए हजारों प्रोजेक्ट्स को पछाड़ते हुए उन्हें यह सम्मान मिला।

क्या है Plas-Stick ? Plas-Stick एक जादुई पाउडर है, जिसे इमली के बेकार बीजों से तैयार किया गया है। यह पानी में तैरते सूक्ष्म माइक्रोप्लास्टिक कणों को आपस में जोड़कर बड़े गुच्छों (clumps) में बदल देता है, जिन्हें बाद में छानकर आसानी से अलग किया जा सकता है।

इस तकनीक की सबसे बड़ी खूबसूरती यह है कि इसके लिए न तो बिजली की जरूरत है और न ही किसी जटिल मशीनरी की। यह पूरी तरह से ईको-फ्रेंडली और कम लागत वाला समाधान है।

कैसे आया नवाचार का विचार? इस प्रोजेक्ट की शुरुआत एक छोटी सी घटना से हुई। छात्रों ने देखा कि कैसे लोग प्लास्टिक कंटेनर से सीधा पानी पी रहे थे, जिसमें माइक्रोप्लास्टिक का खतरा मौजूद था। युवाओं ने महसूस किया कि स्वास्थ्य के इस गंभीर संकट का समाधान सस्ता और सुलभ होना चाहिए।

इस सफर में उन्हें भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) गुवाहाटी के विशेषज्ञों का मार्गदर्शन भी मिला, जिससे उनके विचार को एक वैज्ञानिक आधार प्राप्त हुआ।

ग्रामीण भारत की बदलेगी तस्वीर पुरस्कार जीतने के बाद उत्साहित युवाओं का कहना है कि उनका अगला लक्ष्य इस तकनीक को बड़े पैमाने पर विकसित करना है। वे इसे भारत के ग्रामीण इलाकों तक पहुंचाना चाहते हैं, जहां आधुनिक जल शोधन प्रणालियाँ (water purification systems) उपलब्ध नहीं हैं।

क्या है द अर्थ प्राइज ? द अर्थ फाउंडेशन द्वारा आयोजित यह प्रतियोगिता 13 से 19 वर्ष के युवाओं के लिए दुनिया का सबसे बड़ा पर्यावरण मंच है। विजेताओं को 100,000 अमेरिकी डॉलर की फंडिंग और मेंटरशिप दी जाती है, ताकि वे अपने प्रोटोटाइप को वास्तविक दुनिया की समस्या सुलझाने वाले समाधान में बदल सकें।

संस्थापक पीटर मैकगैरी ने Plas-Stick की तारीफ करते हुए कहा कि कृषि अपशिष्ट (इमली के बीज) का उपयोग कर माइक्रोप्लास्टिक जैसी वैश्विक समस्या का व्यावहारिक हल निकालना वाकई सराहनीय है।

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