हिंद महासागर में स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स की काट: सेशेल्स के जरिए चीन को घेरने की भारत की मास्टर-प्लानिंग
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सेशेल्स यात्रा केवल एक कूटनीतिक दौरा नहीं है, बल्कि यह हिंद महासागर में भारत की बढ़ती रणनीतिक मजबूती का एक बड़ा संकेत है। 27 जून को सेशेल्स पहुंचे पीएम मोदी वहां देश के 50वें स्वतंत्रता दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। भारत और सेशेल्स के राजनयिक संबंधों के 50 वर्ष पूरे होने के इस मौके पर, नई दिल्ली अपनी नेकलेस ऑफ डायमंड्स नीति को और धार दे रही है।

चीन की स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स बनाम भारत का नेकलेस ऑफ डायमंड्स हिंद महासागर में चीन की घेराबंदी करने की रणनीति को स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स कहा जाता है, जिसके तहत बीजिंग पाकिस्तान के ग्वादर, श्रीलंका के हंबनटोटा और बांग्लादेश के मोंगला पोर्ट जैसे ठिकानों पर अपनी पकड़ बना रहा है। इसके जवाब में भारत ने नेकलेस ऑफ डायमंड्स की नीति अपनाई है। इस रणनीति में सेशेल्स एक महत्वपूर्ण कड़ी है, जो अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण चीन की नौसैनिक गतिविधियों पर नजर रखने के लिए भारत की आंख और कान साबित हो रहा है।

असम्प्शन द्वीप: भारत का रणनीतिक तुरुप का पत्ता भारत और सेशेल्स के बीच असम्प्शन द्वीप को विकसित करने का समझौता हुआ है। मोजाम्बिक चैनल के पास स्थित यह द्वीप भारत को समुद्री निगरानी में बढ़त दिलाता है। यहाँ बनने वाली एयरफील्ड और डीप-सी पोर्ट की सुविधा भारतीय नौसेना के पी-8आई पोसाइडन जैसे निगरानी विमानों को लंबी दूरी तक ऑपरेट करने में मदद करेगी, जिससे चीनी पनडुब्बियों पर नजर रखना आसान हो जाएगा।

खुफिया नेटवर्क और सागर नीति भारत ने सेशेल्स में तटीय निगरानी रडार सिस्टम स्थापित किए हैं, जो सीधे भारत के इंफॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर (IFC-IOR) से जुड़े हैं। यह नेटवर्क मेडागास्कर और मॉरीशस के साथ मिलकर हिंद महासागर में एक अभेद्य सुरक्षा घेरा बनाता है। भारत की सागर (Security and Growth for All in the Region) नीति के तहत, सेशेल्स को लगातार गश्ती नौकाएं और आधुनिक उपकरण सौंपकर भारत वहां अपनी मौजूदगी को और अधिक विश्वसनीय बना रहा है।

रक्षा सहयोग को नई ऊंचाई: लेस्पवार की सौगात अपनी यात्रा के दौरान पीएम मोदी ने रक्षा संबंधों को मजबूत करते हुए सेशेल्स को तेज गश्ती जहाज लेस्पवार , एम्बुलेंस और अन्य उपयोगी वाहन सौंपे। इसके साथ ही, भारतीय नौसेना के दो आधुनिक युद्धपोत भी स्वतंत्रता दिवस परेड में हिस्सा ले रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह दौरा न केवल समुद्री सुरक्षा, बल्कि ब्लू इकोनॉमी और विकास सहयोग के जरिए भारत को हिंद महासागर में एक निर्णायक ताकत के रूप में स्थापित कर देगा।

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