भारत में हरित क्रांति: पटरी पर दौड़ने को तैयार देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन
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भारतीय रेलवे ने पर्यावरण के अनुकूल यात्रा की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। दिल्ली और जींद के बीच शुक्रवार को देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का सफल ट्रायल रन किया गया। यह ट्रेन आधुनिक तकनीक और प्रदूषण मुक्त यात्रा का एक बेहतरीन उदाहरण बनने जा रही है।

ट्रायल में किन पहलुओं पर था जोर? शुक्रवार को हुए इस ट्रायल रन के दौरान ट्रेन की कार्यक्षमता को बारीकी से परखा गया। इसमें इमरजेंसी ब्रेकिंग डिस्टेंस (आपातकालीन स्थिति में ब्रेक लगाने की दूरी) और ट्रेन के ऑसिलेशन (हिलने-डुलने) जैसे महत्वपूर्ण मानकों पर ध्यान केंद्रित किया गया। यह ट्रेन 1200 KW हाइड्रोजन फ्यूल सेल प्रोपल्शन सिस्टम से लैस है और 75 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकती है।

पर्यावरण के लिए वरदान हाइड्रोजन ट्रेन का मुख्य उद्देश्य कार्बन उत्सर्जन को शून्य करना है। यह फ्यूल सेल टेक्नोलॉजी हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के बीच केमिकल रिएक्शन से बिजली बनाती है। इस पूरी प्रक्रिया में केवल जल-वाष्प (water vapor) ही निकलता है, जो इसे पारंपरिक डीजल इंजन का एक पूरी तरह से स्वच्छ विकल्प बनाता है।

जींद-सोनीपत होगा पायलट रूट रेलवे ने इस नई तकनीक के संचालन के लिए हरियाणा के जींद-सोनीपत सेक्शन को पायलट रूट के तौर पर चुना है। जींद में ही हाइड्रोजन स्टोरेज और रिफ्यूलिंग की अत्याधुनिक सुविधा स्थापित की गई है। पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव्स सेफ्टी ऑर्गनाइजेशन (PESO) ने यहां कंप्रेस्ड हाइड्रोजन गैस को स्टोर करने का लाइसेंस भी दे दिया है।

सुरक्षा का पूरा इंतजाम रेलवे मंत्रालय ने इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट की सुरक्षा को प्राथमिकता दी है। रिफ्यूलिंग के लिए हाइड्रोजन कम्प्रेशन सिस्टम लगाया गया है और बैकअप के लिए स्टैंडबाय यूनिट भी तैयार है। इसके अलावा, रिफ्यूलिंग स्टेशन पर सेफ्टी सेंसर लगाए गए हैं, जिनकी नियमित जांच की जाएगी।

विशेषज्ञों की रहेगी मौजूदगी इस ट्रेन के संचालन के लिए RDSO (Research Designs and Standards Organisation) द्वारा अनुमोदित ऑपरेशन और मेंटेनेंस मैनुअल तैयार किए गए हैं। शुरुआती दौर में ट्रेन के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए शकूरबस्ती में मेंटेनेंस सुविधा सुनिश्चित की गई है। साथ ही, ट्रेन में हर समय ट्रेंड और सर्टिफाइड टेक्निकल स्टाफ मौजूद रहेगा।

इस पहल के साथ ही भारत अब जर्मनी, जापान, चीन और अमेरिका जैसे विकसित देशों की सूची में शामिल हो गया है, जो हाइड्रोजन रेल ट्रांसपोर्ट की दिशा में तेजी से काम कर रहे हैं।

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