राम मंदिर चंदा घोटाला: चंपत राय पर यति नरसिंहानंद की अभद्र टिप्पणी से मचा सियासी बवाल
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राम मंदिर निर्माण के लिए एकत्रित किए गए श्रद्धालुओं के दान (चंदे) में कथित हेराफेरी का मामला अब एक बड़े विवाद में तब्दील हो गया है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच गाजियाबाद के डासना देवी मंदिर के महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती द्वारा श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय पर की गई अभद्र टिप्पणियां चर्चा का विषय बनी हुई हैं।

चंपत राय पर यति के गंभीर और व्यक्तिगत आरोप

यति नरसिंहानंद ने एक वायरल वीडियो में चंपत राय को लेकर बेहद विवादास्पद दावे किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चंपत राय के साथ रहने वाले लोग उनके ड्राइवर नहीं, बल्कि लाइफ पार्टनर या बॉयफ्रेंड होते हैं। यति ने दावा किया कि दिल्ली में वीएचपी कार्यालय में रहने के दौरान भी चंपत राय लड़कों के बिना नहीं सोते थे । उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चंपत राय चंदा चोरी का काम अपनी संस्था और आकाओं के लिए करते हैं।

इस्तीफा और गिरफ्तारी का घटनाक्रम

राम मंदिर चंदा मामले में 25 जून की रात दर्ज एफआईआर के आधार पर पुलिस ने 8 नामजद आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें चंपत राय के करीबी सहयोगी राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव भी शामिल हैं, जो पहले एक ऑटो ड्राइवर थे। इस विवाद की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए 26 जून को चंपत राय और ट्रस्ट सदस्य अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है।

क्या है चंदा घोटाला मामला?

इस कथित घोटाले की शुरुआत तब हुई जब 7 जून को अखिलेश यादव ने दान में करोड़ों रुपये की हेराफेरी का आरोप लगाया। इसके बाद गठित एसआईटी (SIT) ने 23 जून को अपनी रिपोर्ट में अनियमितताओं की पुष्टि की। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की गंभीर धाराओं (306, 316, 317, 61 आदि) के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले में सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

कौन हैं यति नरसिंहानंद?

यति नरसिंहानंद का वास्तविक नाम दीपक त्यागी है। उन्होंने रूस से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और विदेशों में काम करने के बाद भारत लौटे। पिछले 25 वर्षों से वे डासना देवी मंदिर के महंत हैं और 2021 में उन्हें जूना अखाड़े द्वारा महामंडलेश्वर की उपाधि दी गई थी। हालांकि, वे अपने भड़काऊ भाषणों और हेट स्पीच के लिए हमेशा विवादों में रहे हैं।

विवादों से पुराना नाता

महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती का कानूनी इतिहास काफी लंबा रहा है:

फिलहाल, इस पूरे मामले में जांच का दायरा बढ़ता जा रहा है और ट्रस्ट के प्रबंधन में रही खामियों पर सरकार और प्रशासन की पैनी नजर है।

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