ट्रंप का नया ईरान दांव : जिस कृषि उत्पाद को भारत ने ठुकराया, उसे ईरान को बेचना चाहते हैं अमेरिकी राष्ट्रपति
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अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक चौंकाने वाला प्रस्ताव रखा है। ट्रंप ईरान के उन अरबों डॉलर के फंड का इस्तेमाल करना चाहते हैं, जो अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण लंबे समय से फ्रीज हैं। इस पैसे से ईरान को अमेरिकी कृषि उत्पाद—जैसे गेहूं, सोयाबीन और मक्का—खरीदने के लिए मजबूर किया जाएगा।

भारत ने जिस सौदे से किया था इनकार

दिलचस्प बात यह है कि ट्रंप प्रशासन इन्हीं कृषि उत्पादों को भारत को निर्यात करने के लिए काफी समय से दबाव बना रहा था और एक बड़े व्यापार समझौते की कोशिश में था। हालांकि, भारत ने अपनी घरेलू खाद्य सुरक्षा और किसानों के हितों का हवाला देते हुए अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए अपने बाजार पूरी तरह से खोलने से साफ इनकार कर दिया था। अब ट्रंप उसी माल को मानवीय सहायता का नाम देकर ईरान को बेचना चाहते हैं।

किसानों के लिए नया ईरानी बाजार

व्हाइट हाउस में एक कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने इस योजना का खुलासा किया। उन्होंने कहा, हम किसानों के लिए नए बाजार खोल रहे हैं। ईरान एक सुंदर देश है, जहां भोजन का संकट है। हम उनके फंसे हुए पैसे लेंगे और उससे अपने किसानों का मक्का, गेहूं और सोयाबीन खरीदकर उन्हें भेजेंगे। ट्रंप के अनुसार, यह कदम अमेरिकी अर्थव्यवस्था और किसानों के लिए बहुत बड़ा साबित होगा।

फ्रीज संपत्ति पर अमेरिका का कंट्रोल

स्विस वार्ता में हुए समझौते के तहत करीब 12 अरब डॉलर की ईरानी संपत्ति जारी करने की बात कही गई है। ट्रंप का स्पष्ट कहना है कि यह पैसा सीधे ईरान को नहीं मिलेगा, बल्कि एक एस्क्रो खाते में रहेगा जिसे अमेरिका नियंत्रित करेगा। इसका उपयोग केवल अमेरिका से ही कृषि और चिकित्सा सामग्री खरीदने के लिए किया जा सकेगा।

ईरान ने ट्रंप की शर्तों को ठुकराया

तेहरान ने अमेरिका के इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा, ईरान अपनी संपत्तियों का मालिक है और यह फैसला हम करेंगे कि हमें क्या खरीदना है। हम केवल वॉशिंगटन की शर्तों पर अपने पैसे खर्च करने के लिए बाध्य नहीं हैं। ईरान का कहना है कि वे अपनी जरूरत के अनुसार किसी भी देश से माल खरीदेंगे, न कि अमेरिकी किसानों को समृद्ध बनाने के लिए मजबूर होकर।

ट्रंप की मल्टी-परपज रणनीति

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ट्रंप इस कदम से एक साथ कई निशाने साध रहे हैं:

  1. वोट बैंक की राजनीति: यह कदम अमेरिकी किसानों (जो ट्रंप का मुख्य वोटर बेस हैं) को खुश करने के लिए उठाया गया है।
  2. आर्थिक दबाव: ईरान के फंड पर नियंत्रण रखकर वे उसे अपनी शर्तों पर चलने के लिए मजबूर करना चाहते हैं।
  3. भारत-चीन को संदेश: भारत और चीन द्वारा अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए बाजार न खोलने के बाद, ट्रंप यह दिखाना चाहते हैं कि उनके पास माल खपाने के लिए अन्य विकल्प मौजूद हैं।

फिलहाल, शांति वार्ता के बीच यह योजना दोनों देशों के बीच एक नया विवाद बनकर उभर रही है। जहां अमेरिका इसे मानवीय कदम बता रहा है, वहीं ईरान इसे अपनी आर्थिक संप्रभुता पर हमला मानकर चुनौती दे रहा है।

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