चीन-पाक को कड़ी चुनौती: भारत का मास्टरप्लान, ढाका में दिनेश त्रिवेदी को कैबिनेट रैंक
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नई दिल्ली: भारत ने बांग्लादेश के साथ अपने कूटनीतिक रिश्तों को नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए एक बड़ा दांव खेला है। ढाका में भारतीय उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी को कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया है। गृह मंत्रालय के एक मेमोरेंडम के जरिए इस अहम फैसले की जानकारी दी गई है। यह कदम न केवल भारत की पड़ोसी प्रथम (Neighborhood First) नीति को दर्शाता है, बल्कि चीन और पाकिस्तान जैसे देशों के लिए एक कड़ा रणनीतिक संदेश भी है।

कैबिनेट रैंक का कूटनीतिक वजन

दिनेश त्रिवेदी कोई साधारण आईएफएस अधिकारी नहीं, बल्कि अनुभवी राजनेता हैं। उन्हें कैबिनेट रैंक देना एक दुर्लभ निर्णय है, जो प्रोटोकॉल से कहीं ऊपर है। अब त्रिवेदी को बांग्लादेश के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के साथ सीधे और उच्च-स्तरीय संवाद करने का अधिकार मिल गया है। इतिहास में वी.के. कृष्ण मेनन और एल.एम. सिंघवी जैसी हस्तियों को ही विदेश में ऐसा दर्जा दिया गया था, जो भारत के लिए ढाका मिशन की सर्वोच्च प्राथमिकता को स्पष्ट करता है।

चीन-पाक की चालों पर भारत की नजर

बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद से वहां के हालात बदले हैं। नए प्रधानमंत्री तारिक रहमान की चीन यात्रा और चीन द्वारा बांग्लादेश को फाइटर जेट देने की कोशिश भारत के लिए चिंता का विषय है। बीजिंग की चेकबुक डिप्लोमेसी और तीस्ता रिवर प्रोजेक्ट के जरिए बांग्लादेश की संप्रभुता में दखल देने की कोशिशों को नाकाम करना भारत के लिए चुनौती है। त्रिवेदी की नियुक्ति यह सुनिश्चित करेगी कि ढाका चीनी जाल में न फँसे।

फिर से शुरू हुई टूरिस्ट वीजा सेवा

रिश्तों में आई खटास को कम करने की दिशा में भारत ने एक और बड़ा कदम उठाया है। ढाका में उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने घोषणा की कि 28 जून से बांग्लादेशी नागरिकों के लिए टूरिस्ट वीजा सेवा फिर से शुरू हो गई है। फिलहाल यह ढाका, राजशाही, चटगांव, सिलहट और खुलना सहित पांच प्रमुख केंद्रों से संचालित होगी। यह कदम दोनों देशों के बीच जनता के स्तर पर संबंधों को सुधारने के लिए महत्वपूर्ण है।

विशेषज्ञों की राय: कूटनीति में फ्रेश इनोवेशन

जेएनयू के डीन और विशेषज्ञ अमिताभ मट्टू ने इस फैसले को प्रधानमंत्री मोदी का रिफ्रेशिंग कूटनीतिक इनोवेशन करार दिया है। उनका मानना है कि पड़ोसी देशों के साथ रिश्तों में अब पारंपरिक नौकरशाही के बजाय राजनीतिक वजन की आवश्यकता है। अमेरिका ने भी इस नियुक्ति का स्वागत किया है, जिससे स्पष्ट है कि दक्षिण एशिया में भारत की यह सक्रियता वैश्विक स्तर पर भी सराही जा रही है।

भविष्य की रणनीति: ट्रेड से कनेक्टिविटी तक

दिनेश त्रिवेदी का उच्च पदस्थ होना उन रुके हुए रोड और रेल प्रोजेक्ट्स को गति देगा, जो भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों तक पहुंच बनाने के लिए जरूरी हैं। कैबिनेट रैंक मिलने से वे वहां के स्थानीय मंत्रियों से बिना किसी देरी के निर्णय ले सकेंगे। भारत अब पुरानी कड़वाहट को पीछे छोड़ते हुए बांग्लादेश के साथ एक मजबूत, स्थिर और रणनीतिक साझेदारी बनाने की ओर अग्रसर है, जो भविष्य में नेपाल, श्रीलंका और मालदीव जैसे देशों के लिए एक नया डिप्लोमेटिक मॉडल साबित हो सकता है।

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