पासपोर्ट नहीं, आधार भी नहीं: तो भारत में अपनी नागरिकता कैसे साबित करें?
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पासपोर्ट सेवा दिवस पर विदेश मंत्रालय के एक बयान ने देश में एक नई बहस छेड़ दी है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भारतीय पासपोर्ट केवल एक यात्रा दस्तावेज है, इसे नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता। इस बयान के बाद 1.4 अरब भारतीयों के मन में यह यक्ष प्रश्न खड़ा हो गया है कि यदि पासपोर्ट, आधार और वोटर आईडी नागरिकता के सबूत नहीं हैं, तो आखिर वह दस्तावेज है क्या जो यह साबित करे कि हम भारत के नागरिक हैं?

पासपोर्ट सिर्फ एक यात्रा परमिट है

कानूनी रूप से देखें तो पासपोर्ट अधिनियम, 1967 के तहत पासपोर्ट विदेश यात्रा को सुगम बनाने के लिए जारी किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य विदेशी सरकारों को यह बताना है कि धारक भारत का नागरिक है, ताकि उसे वीजा और सुरक्षा मिल सके। लेकिन भारत की सीमा के भीतर, यह नागरिकता का कोई अंतिम प्रमाण पत्र नहीं है। सरकार स्पष्ट कर चुकी है कि पासपोर्ट होने का मतलब यह नहीं है कि आपकी नागरिकता का सत्यापन पूरा हो गया है।

क्यों आधार और वोटर आईडी फेल हैं?

सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा भ्रम आधार और वोटर आईडी को लेकर है। आधार अधिनियम 2016 की धारा 9 स्पष्ट कहती है कि आधार नंबर नागरिकता का प्रमाण नहीं है। वहीं, वोटर आईडी कार्ड केवल यह दर्शाता है कि आपका नाम मतदाता सूची में दर्ज है। अदालतों ने भी कई मामलों में यह माना है कि इन दस्तावेजों का आधार केवल पहचान या निवास का प्रमाण है, नागरिकता का नहीं। 2025 में मुंबई हाई कोर्ट ने भी इसी रुख को दोहराया था।

तो नागरिकता का पक्का सबूत क्या है?

भारतीय नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत देश में नागरिकता जन्म, वंश, पंजीकरण या प्राकृतिक तरीके से मिलती है। कानून के जानकारों और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों (सर्बानंद सोनोवाल बनाम भारत संघ) के अनुसार, नागरिकता सिद्ध करने के लिए जन्म से जुड़े दस्तावेज सबसे महत्वपूर्ण हैं:

क्या भारत को एक एकीकृत प्रणाली की जरूरत है?

वर्तमान में भारत में नागरिकता साबित करने के लिए कोई एकल यूनिवर्सल दस्तावेज मौजूद नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि देश को एक ऐसी प्रणाली की आवश्यकता है जो जन्म प्रमाण पत्र, वंश दस्तावेजों और अन्य सरकारी पहचान पत्रों को एक डिजिटल मंच पर जोड़ सके। जब तक ऐसा नहीं होता, करोड़ों भारतीय तकनीकी रूप से इस दुविधा में रहेंगे कि दर्जनों सरकारी दस्तावेज होने के बावजूद उनके पास नागरिकता का कोई एक पक्का सबूत नहीं है।

खासकर तब, जब देश में एक बड़ा वर्ग ऐसा भी है जिसके पास आज भी जन्म प्रमाण पत्र जैसे बुनियादी दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं। सवाल यह है कि नागरिकता की परिभाषा जब इतनी जटिल है, तो आम नागरिक अपनी पहचान को कानून की नजर में कैसे सुरक्षित रखे?

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