पाकिस्तान की आदत नहीं गई: 4 हफ्तों में 4 बार UN में भारत ने लगाई जबरदस्त फटकार
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पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर के मुद्दे को लेकर अपनी नापाक हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बार-बार भारत के खिलाफ जहर उगलने वाले पाकिस्तान को भारत ने हाल ही में लगातार चार हफ्तों में चौथी बार आईना दिखाया है। भारत ने दो टूक शब्दों में कह दिया है कि कश्मीर पूरी तरह से उसका आंतरिक मामला है।

संयुक्त राष्ट्र में भारत की दो-टूक 24 जून 2026 को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र के मंच पर भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत परवथानेनी हरीश ने पाकिस्तान को खरी-खरी सुनाई। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान का बार-बार इस मुद्दे को उठाना न केवल अवांछित है, बल्कि बेतुका भी है। भारत ने स्पष्ट किया कि जो देश खुद निष्पक्षता की उम्मीद करता है, उसका इस तरह से मंच का राजनीतिकरण करना शर्मनाक है।

आतंकवाद पर भी घेरा केवल न्यूयॉर्क ही नहीं, 19 जून को जिनेवा में भी पाकिस्तान बेनकाब हुआ। UNHRC में भारत की ओर से अनुपमा सिंह ने पाकिस्तान और इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) के बयानों को सिरे से खारिज कर दिया। भारत ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान अपने देश की आंतरिक विफलताओं और आतंकवाद के समर्थन से दुनिया का ध्यान भटकाने के लिए दुष्प्रचार का सहारा ले रहा है।

गिलगित-बाल्टिस्तान पर कड़ा रुख 5 जून को भारत ने पाकिस्तान को उसकी हदों का अहसास कराया। जब पाकिस्तान ने अवैध रूप से कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान में चुनाव कराने की कोशिश की, तो भारत के विदेश मंत्रालय ने कड़ा विरोध जताया। भारत ने स्पष्ट किया कि गिलगित-बाल्टिस्तान और लद्दाख का पूरा क्षेत्र 1947 में कानूनी तौर पर भारत का हिस्सा बन चुका है। पाकिस्तान का वहां मानवाधिकारों का हनन और शोषण छिपाने का यह नया हथकंडा है।

यूरोपीय संघ के साथ मिलकर भी नाकाम जून महीने की शुरुआत (2 जून) में जब यूरोपीय संघ और पाकिस्तान ने एक संयुक्त बयान में कश्मीर की तुलना यूक्रेन संघर्ष से करने की कोशिश की, तो भारत ने इसे तुरंत खारिज कर दिया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सख्त लहजे में कहा कि जिन लोगों का इन मामलों से कोई लेना-देना नहीं है, उन्हें गैर-जरूरी टिप्पणी करने से परहेज करना चाहिए।

चौतरफा बेइज्जती के बावजूद पाकिस्तान का बार-बार एक ही मुद्दे पर मुंह की खाना साबित करता है कि वह अपनी कूटनीतिक कंगाली की ओर बढ़ रहा है। वहीं, भारत ने हर बार यह साफ कर दिया है कि कश्मीर का भविष्य कोई और नहीं, बल्कि भारत खुद तय करता है।

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