राजस्थान की सियासत: डोटासरा ने किरोड़ी लाल मीणा के सामने रखी साढ़ू बने रहने की शर्त
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राजस्थान की राजनीति में कभी एक-दूसरे को साढ़ू कहकर संबोधित करने वाले गोविंद सिंह डोटासरा और किरोड़ी लाल मीणा के बीच अब तल्खियां बढ़ गई हैं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष डोटासरा ने साफ कर दिया है कि वे किरोड़ी लाल को अपना असली साढ़ू तभी मानेंगे, जब वे कृषि विभाग में कथित खाद-बीज घोटाले की जांच के लिए मुख्यमंत्री को पत्र लिखेंगे।

साढ़ू के रिश्ते में आई दरार की वजह डोटासरा ने तंज कसते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि किरोड़ी लाल अपनी ईमानदारी साबित करें। उन्होंने कहा, दूसरों पर कीचड़ उछालने से पहले खुद के गिरेबान में झांकना जरूरी है। अगर खाद-बीज घोटाले की जांच नहीं करवाई, तो वे मेरे साढ़ू नहीं हो सकते।

किरोड़ी लाल का वार: RAS भर्ती में फर्जीवाड़े का आरोप इस विवाद की जड़ में किरोड़ी लाल मीणा द्वारा मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा को लिखा गया एक पत्र है। इसमें मंत्री ने डोटासरा और उनके समधी रमेश चंद पूनिया पर फर्जी ओबीसी सर्टिफिकेट के जरिए अपने बच्चों को RAS अधिकारी बनवाने का गंभीर आरोप लगाया है।

किरोड़ी का दावा है कि डोटासरा ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर बेटे अविनाश को इंटरव्यू में अनुचित लाभ दिलाया। साथ ही, रमेश चंद पूनिया पर नियमों को ताक पर रखकर अपनी तीन संतानों को आरक्षित कोटे से नौकरी लगवाने का आरोप लगाया है।

डोटासरा का पलटवार: बुढ़ापा खराब होने की चेतावनी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए डोटासरा ने किरोड़ी लाल को चेतावनी दी है। डोटासरा ने कहा, किसी को इतना मत छेड़ो कि तुम्हारा बुढ़ापा खराब हो जाए। अगर उनमें नैतिकता है, तो वे इस्तीफा देकर मैदान में आएं। वे पिछले चार साल से केवल आरोप लगा रहे हैं, जबकि सच्चाई यह है कि आरपीएससी और कार्मिक विभाग पहले ही इन प्रमाणपत्रों को वैध मान चुका है।

दस्तावेजों की सच्चाई क्या है? गौरतलब है कि जिन ओबीसी सर्टिफिकेट्स पर सवाल उठाए जा रहे हैं, वे पूर्व में हुई सरकारी जांचों में सही पाए जा चुके हैं। नियमों के अनुसार, डोटासरा के समधी-समधन थर्ड ग्रेड शिक्षक रहे हैं और उनका पे-स्केल क्रीमी लेयर की सीमा में नहीं आता। डोटासरा का तर्क है कि विधायक का पद भी क्रीमी लेयर में नहीं गिना जाता, इसलिए उनके बेटे के दस्तावेज पूरी तरह कानूनी और वैध हैं।

अब आगे क्या? डोटासरा ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि किरोड़ी लाल द्वारा लगाए गए सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाए, लेकिन साथ ही उन्होंने कृषि विभाग के कथित घोटाले की जांच पर भी जोर दिया है। अब देखना यह होगा कि क्या सरकार इस मामले में कोई कदम उठाती है या यह राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप केवल बयानों तक ही सीमित रहेगा।

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