रणजी क्रिकेटर से खूंखार दरिंदा: कैसे सत्तू का अपराध का साम्राज्य पुलिस की गोलियों से हुआ खत्म
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मुजफ्फरनगर के पचैंडा गांव का रहने वाला सतपाल उर्फ सत्तू, जो कभी क्रिकेट के मैदान पर अपनी गेंदबाजी का लोहा मनवाता था, सोमवार रात पुलिस मुठभेड़ में ढेर हो गया। बामनहेड़ी रेलवे स्टेशन के पास हुई इस मुठभेड़ के साथ ही एक ऐसे अपराधी का अंत हो गया, जिसने रणजी ट्रॉफी की सफेद जर्सी से लेकर अंडरवर्ल्ड और दरिंदगी तक का लंबा सफर तय किया था।

क्रिकेट के मैदान से अंडरवर्ल्ड तक का सफर सतपाल 1996 में रणजी ट्रॉफी का हिस्सा रह चुका था और उसने युवराज सिंह जैसे दिग्गज खिलाड़ियों के साथ मैच खेले थे। हालांकि, उसकी आक्रामक प्रवृत्ति खेल के मैदान पर भी हावी रही। उसने युवराज सिंह के पिता योगराज सिंह पर जानलेवा हमला कर अपनी आपराधिक पहचान बनानी शुरू कर दी थी। 2007 में वह चंडीगढ़ में पार्षद बना, लेकिन राजनीति की ओट में उसका अपराध का साम्राज्य फैलता गया।

जेल से ही चलाता था खूनी नेटवर्क 2010 में ट्रक लूट के बाद वह सलाखों के पीछे पहुंचा और वहां से छोटा राजन गैंग से हाथ मिला लिया। वह इतना शातिर था कि जेल के भीतर भी अपनी झूठी कहानियां बुनता था। एक बार उसने अपनी बेटी के एसडीएम बनने का झूठ फैलाकर जेल प्रशासन को गुमराह किया। 6 फरवरी 2026 को बीमारी का नाटक कर वह पुलिस कस्टडी से फरार हो गया और फिर उसने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

फौजी बनकर करता था मासूमों का शिकार जेल से भागने के बाद उसने अनिकेत फौजी के रूप में अपनी जाली पहचान बनाई। वह खुद को सेना का अधिकारी बताकर गरीब परिवारों को सरकारी नौकरी का झांसा देता था। इसी जाल में फंसाकर वह युवतियों का अपहरण करता था। तितावी क्षेत्र की एक किशोरी का अपहरण और गैंगरेप उसके अपराधों की सूची में सबसे शर्मनाक अध्याय बन गया। वह जंगल के रास्तों का इस्तेमाल करता और ट्रैकिंग से बचने के लिए केवल कीपैड मोबाइल का उपयोग करता था।

आखिरी एनकाउंटर: पुलिस की जवाबी कार्रवाई सोमवार रात मुजफ्फरनगर पुलिस और एसओजी की टीम ने जब उसे घेरने की कोशिश की, तो सत्तू ने पुलिस पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। इस मुठभेड़ में एक दरोगा और एक सिपाही घायल हो गए। आत्मरक्षा में की गई जवाबी फायरिंग में सत्तू के पैरों में गोलियां लगीं। अस्पताल ले जाते समय उसकी मौत हो गई।

24 संगीन मामलों का अंत सत्तू के पास से लूटी गई कार, अवैध हथियार और अपहृत किशोरी के जेवर बरामद हुए हैं। उसके खिलाफ उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ समेत चार राज्यों के 10 जिलों में हत्या, लूट और बलात्कार के 24 मुकदमे दर्ज थे। एक प्रतिभावान खिलाड़ी के अपराधी बनने और अंततः पुलिस एनकाउंटर में मारे जाने की यह कहानी, अपराध के रास्ते पर चलने वालों के लिए एक खौफनाक सबक है।

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