लखनऊ अग्निकांड: मदद की आखिरी पुकार भी नहीं बचा सकी इन जिंदगियों को, धुएं में खो गए 15 परिवारों के सपने
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लखनऊ के अलीगंज इलाके में सोमवार को एक व्यावसायिक इमारत में लगी भीषण आग ने न केवल 15 लोगों की जान ली, बल्कि कई परिवारों के भविष्य को हमेशा के लिए अंधेरे में धकेल दिया। तीन मंजिला इमारत में लगी इस आग ने उन सभी उम्मीदों को राख कर दिया, जिन्हें लोग बेहतर कल के लिए संजोकर बैठे थे।

अधूरे रह गए सुनहरे सपने इस हादसे का शिकार हुए लोग अलग-अलग सपनों के साथ जी रहे थे। कोई अपने परिवार का सहारा था, तो कोई विदेश जाने की तैयारी में था। 22 वर्षीय आईटी तकनीशियन अब्दुल रहमान अपने लकवाग्रस्त पिता की एकमात्र उम्मीद थे। वहीं, 18 वर्षीय शाहजान अपने छोटे से कारोबारी परिवार के सपने को नई ऊंचाई देने के लिए कंप्यूटर सीख रहे थे, ताकि विदेश में बेहतर भविष्य बना सकें।

मदद की आखिरी गुहार भी बेअसर मृतकों में शामिल 25 वर्षीय थ्री-डी कलाकार आदित्य श्रीवास्तव की कहानी सबसे अधिक झकझोरने वाली है। आग की लपटों के बीच घिरे आदित्य ने अपने मित्र को फोन कर बचने के लिए आखिरी गुहार लगाई थी, लेकिन समय की कमी और भीषण आग ने उन्हें बचाने का मौका नहीं दिया। हाल ही में उन्होंने अपने करियर के लिए नया कंप्यूटर खरीदा था और उत्तराखंड घूमने की योजना बना रहे थे।

शादी की खुशियां मातम में बदलीं बाराबंकी के मोहम्मद अम्मार (24) की मौत ने उनके परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। अम्मार अपने घर के इकलौते कमाऊ सदस्य थे। परिजनों के अनुसार, जल्द ही उनकी शादी के लिए घर में तैयारियां शुरू होने वाली थीं, लेकिन अचानक आए इस हादसे ने सारी खुशियों को मातम में बदल दिया।

पोस्टमार्टम हाउस में बिखरे परिजन हादसे के बाद लखनऊ के केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर और पोस्टमार्टम हाउस में परिजनों का दर्द असहनीय था। घंटों तक अपने बच्चों को अस्पतालों में ढूंढने के बाद, जब सच्चाई सामने आई तो परिजनों का सब्र टूट गया। ट्रॉमा सेंटर के कर्मचारियों के लिए भी यह एक कठिन चुनौती थी कि वे कैसे उन माता-पिता को बताएं कि उनके प्रियजन अब इस दुनिया में नहीं रहे।

अभी भी गमगीन है पूरा इलाका इस अग्निकांड में 15 लोगों की दुखद मौत और नौ लोगों के घायल होने की खबर ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। हादसे की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जिसमें इमारत से जान बचाने के लिए कूदते हुए छात्र देखे जा सकते हैं। फिलहाल प्रशासनिक अमला मामले की जांच में जुटा है, लेकिन उन पीड़ितों के परिवारों के लिए यह घाव शायद ही कभी भर पाएगा।

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