स्विट्जरलैंड में अमेरिका-ईरान वार्ता के बीच उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस के एक बयान ने वाशिंगटन में सियासी बवाल खड़ा कर दिया है। वेंस द्वारा पाकिस्तानी सेना प्रमुख को पसंदीदा व्यक्ति बताने पर अमेरिकी सांसदों ने तीखी नाराजगी जताई है।
क्या है जेडी वेंस का पाकिस्तानी प्रेम ? स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता वार्ता के दौरान जेडी वेंस ने पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ असीम मुनीर से मुलाकात की। इस दौरान वेंस ने मुनीर की तारीफ करते हुए कहा कि वे उनके दो सबसे पसंदीदा लोगों में से एक हैं। वेंस ने यहां तक कहा कि उनकी जिंदगी में एक जगह उनकी पत्नी (जो भारतीय मूल की हैं) की है और दूसरी पाकिस्तानी फील्ड मार्शल मुनीर की। वेंस का यह बयान आते ही अमेरिका में विवाद शुरू हो गया।
सांसदों का फूटा गुस्सा: आतंकी पनाहगाह से दोस्ती क्यों? अमेरिकी सीनेटर रिक स्कॉट ने वेंस के बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि वेंस को यह समझना चाहिए कि अमेरिका के असली दोस्त कौन हैं। स्कॉट ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान का इतिहास आतंकवादियों को पनाह देने और उन्हें पालने का रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि वेंस शांति के बजाय ईरान के दशकों पुराने आतंकी मंसूबों को परोक्ष रूप से समर्थन दे रहे हैं।
ओसामा बिन लादेन और ISI का काला इतिहास सीनेटर टिम शीही ने और भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने इंटरव्यू में याद दिलाया कि ओसामा बिन लादेन को 10 सालों तक छिपाकर रखने वाला देश पाकिस्तान ही था। शीही ने कहा, हमें वह समय नहीं भूलना चाहिए जब पाकिस्तान ने ISI के जरिए अयातुल्ला अली खामेनेई को फंड मुहैया कराया था। जो देश अलकायदा के सरगना को पनाह दे सकता है, उसे शांति वार्ता का मध्यस्थ मानना अमेरिका की बड़ी गलती है।
पाकिस्तान-कतर नहीं, ये देश हैं हमारे असली साथी अमेरिकी सांसदों का मानना है कि मध्यस्थता के लिए पाकिस्तान और कतर पर भरोसा करना गलत है। सीनेटर शीही ने जोर देकर कहा कि अगर अमेरिका को मिडिल ईस्ट में अपनी स्थिति मजबूत करनी है, तो उसे इजराइल, यूएई और सऊदी अरब को वार्ता की प्राथमिकता सूची में रखना चाहिए। उन्होंने कहा, बिना किसी संदेह के, इजराइल और यूएई ही हमारे सबसे विश्वसनीय सहयोगी हैं। हमें आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले देशों के बजाय अपने इन पुराने और भरोसेमंद मित्रों के साथ मजबूती से खड़ा होना चाहिए।
तनाव के बीच कूटनीति पर सवाल फिलहाल मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर है। ईरान और अमेरिका के बीच वार्ता के लिए पाकिस्तान की भूमिका को लेकर न केवल बाहरी बल्कि अमेरिकी प्रशासन के भीतर भी सवाल उठ रहे हैं। जानकारों का कहना है कि वेंस का यह बयान आने वाले समय में ओवल ऑफिस के लिए एक बड़ी राजनीतिक मुसीबत बन सकता है।
Prime Minister Muhammad Shehbaz Sharif meeting with Vice President of the United States J.D. Vance on the sidelines of US-Iran technical level talks as a follow -up of Islamabad MoU, being held in Burgenstock, Switzerland, 21 June 2026.#PakistanForPeace pic.twitter.com/vqHHvFhXVR
— Prime Minister s Office (@PakPMO) June 21, 2026
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