भारतीय रेलवे में आरएसी (RAC) सीट अलॉटमेंट को लेकर एक बार फिर बहस छिड़ गई है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक महिला यात्री को एक अनजान पुरुष के साथ आरएसी सीट शेयर करने पर मजबूर होना पड़ा। महिला ने रेलवे की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
महिला का दर्द: पूरी रात कैसे एडजस्ट करूं? वीडियो में दिख रही महिला यात्री ने नाराजगी जताते हुए कहा, मेरा टिकट आरएसी है और मुझे एक पुरुष के साथ सीट दी गई है। क्या रेलवे को महिला सुरक्षा की कोई परवाह नहीं है? एक महिला के लिए किसी अनजान शख्स के साथ पूरी रात एक ही सीट पर सफर करना बेहद असहज और असुरक्षित है।
महिला ने यह भी आरोप लगाया कि मदद के लिए कोई टीटीई (TTE) भी मौके पर उपलब्ध नहीं था। उन्होंने सवाल किया कि लंबी दूरी की यात्रा में रेलवे को जेंडर-सेंसिटिव अलॉटमेंट क्यों नहीं करना चाहिए?
क्या कहता है रेलवे का नियम? रेलवे के नियमों के अनुसार, आरएसी सीट का उद्देश्य दो यात्रियों को एक बर्थ साझा करने की सुविधा देना है ताकि किसी का सफर न छूटे। आईआरसीटीसी (IRCTC) की मौजूदा व्यवस्था में लिंग (Gender) के आधार पर सीट अलॉटमेंट को लेकर कोई अनिवार्य बाध्यता नहीं है।
रेलवे का कहना है कि कोशिश यही होती है कि महिला-महिला या पुरुष-पुरुष को साथ रखा जाए, लेकिन यह कोई गारंटी नहीं है। यह पूरी तरह से बुकिंग के दौरान उपलब्ध सीटिंग पर निर्भर करता है।
इंटरनेट पर छिड़ी बहस सोशल मीडिया पर इस वीडियो के सामने आने के बाद यूजर्स दो गुटों में बंट गए हैं। कुछ यूजर्स महिला के समर्थन में खड़े होकर रेलवे की जेंडर-सेंसिटिव पॉलिसी की कमी पर सवाल उठा रहे हैं। वहीं, कुछ यूजर्स का तर्क है कि आरएसी का टिकट लेते समय यात्रियों को इन जोखिमों का पहले से पता होता है।
कुछ लोगों का सुझाव है कि अगर किसी महिला को आपत्ति है, तो उसे टीटीई से संपर्क करना चाहिए या फिर टिकट कैंसिल कर रिफंड लेने का विकल्प चुनना चाहिए।
क्या बदलाव की है जरूरत? यह कोई पहली बार नहीं है जब आरएसी सीट पर महिला-पुरुष को साथ बैठाने को लेकर विवाद हुआ है। यात्रियों का एक बड़ा वर्ग मांग कर रहा है कि रेलवे को अपनी सॉफ्टवेयर प्रणाली में सुधार करना चाहिए ताकि आरएसी अलॉटमेंट में कम से कम लिंग का ध्यान रखा जा सके। अब देखना यह है कि क्या रेलवे इस मांग पर कोई ठोस नीति अपनाएगा।
⚠️ Woman allotted an RAC seat with an unknown male passenger.
— Jharkhand Rail Users (@JharkhandRail) June 22, 2026
Should Indian Railways rethink its RAC allocation system and introduce gender-sensitive seating policies?
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