महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना (यूबीटी) के भीतर मची उठापटक के बीच एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है। मुंबई उत्तर-पूर्व के सांसद संजय दीना पाटिल के एकनाथ शिंदे गुट में शामिल होने की अटकलों के बीच, उनकी बेटी राजुल संजय पाटिल ने पिता के विपरीत रुख अपनाते हुए उद्धव ठाकरे के प्रति अटूट निष्ठा जताई है। इस कदम ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है।
मातोश्री पहुंचकर किया रुख साफ राजुल पाटिल ने 21 जून को सीधे मातोश्री पहुंचकर उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि वे शिवसेना (यूबीटी) के साथ मजबूती से खड़ी हैं। राजुल ने दो टूक शब्दों में कहा, मेरे पिता बागी हो सकते हैं, लेकिन मैं वफादार हूं। इस बयान ने यह साबित कर दिया है कि ठाकरे परिवार के प्रति उनकी निष्ठा किसी भी पारिवारिक समीकरण से ऊपर है।
कौन हैं राजुल संजय पाटिल? राजुल पाटिल मुंबई की राजनीति में एक उभरता हुआ चेहरा हैं। वे न केवल सांसद संजय दीना पाटिल की बेटी हैं, बल्कि भांडुप के वार्ड नंबर 114 से पूर्व बीएमसी कॉर्पोरेटर भी रह चुकी हैं। राजुल युवा सेना की कोर कमेटी की सक्रिय सदस्य हैं और अपनी सामाजिक संस्था जीवन्दान के जरिए जमीनी स्तर पर काफी लोकप्रिय हैं। युवाओं के बीच उनकी मजबूत पकड़ उन्हें एक प्रभावशाली नेता बनाती है।
हमारे घर में फैसले की आजादी मीडिया से बात करते हुए जब राजुल से उनके पिता के बागी तेवरों के बारे में सवाल पूछा गया, तो उन्होंने बहुत ही परिपक्वता से जवाब दिया। उन्होंने कहा, हमारे घर में व्यक्तिगत फैसले लेने की आजादी है। मेरे पिता अपना निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र हैं, लेकिन मैं अपनी निष्ठा उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे के साथ स्पष्ट कर चुकी हूं।
उद्धव की सेना के लिए एक उम्मीद की किरण वर्तमान में शिवसेना (यूबीटी) गंभीर संकट से गुजर रही है। हाल ही में दिल्ली में हुई संसदीय दल की बैठक से 6 सांसदों के गायब रहने के बाद पार्टी में खलबली मची हुई है। ऐसे नाजुक समय में, राजुल का उद्धव ठाकरे के साथ खड़े होना पार्टी के लिए मनोबल बढ़ाने वाला कदम है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राजुल का यह स्टैंड युवा कार्यकर्ताओं के लिए एक संदेश है कि संकट के समय विचारधारा ही सर्वोपरि है।
आगे की राह क्या? एक तरफ उद्धव ठाकरे बागी सांसदों के निर्वाचन क्षेत्रों में जाकर जनता से जुड़ने की तैयारी कर रहे हैं, वहीं राजुल पाटिल भी अपने क्षेत्र में सक्रिय होने के लिए तैयार हैं। शिंदे गुट की रणनीति के बीच राजुल का यह कदम न केवल एक परिवार की कहानी है, बल्कि यह दर्शाता है कि महाराष्ट्र की सियासत में निष्ठाएं अब व्यक्तिगत आधार पर तय हो रही हैं। क्या अन्य बागी नेता भी राजुल की तरह वापस लौटेंगे? यह आने वाला समय ही बताएगा।
गेल्या काही दिवसांपासून महाराष्ट्राच्या राजकारणात मोठ्या घडामोडी घडत आहेत.
— Rajool Sanjay Patil (@RajoolP) June 21, 2026
आज शिवसेना पक्षप्रमुख मा. उद्धवजी ठाकरे साहेब आणि शिवसेना नेते, युवासेना प्रमुख मा. आदित्यजी ठाकरे साहेब यांची भेट घेऊन मी माझी राजकीय भूमिका स्पष्ट केली.
माझ्यावर विश्वास ठेवणाऱ्या प्रभागातील… pic.twitter.com/EvPoLAMWBz
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