स्विट्जरलैंड/वाशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच रिश्तों में सुधार की कोशिशें एक बार फिर संकट में घिरती दिख रही हैं। एक तरफ स्विट्जरलैंड में शांति समझौते को अंतिम रूप देने के लिए उच्च स्तरीय बैठकें चल रही हैं, तो दूसरी तरफ अमेरिका से डोनाल्ड ट्रंप की आक्रामक बयानबाजी ने तनाव बढ़ा दिया है।
ट्रंप की दो टूक: हमला और जोरदार होगा स्विट्जरलैंड में बैठक शुरू होते ही ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक तीखा पोस्ट किया। उन्होंने ईरान को चेतावनी दी कि वह लेबनान में अपने प्रॉक्सी (हथियारबंद समूहों) को तुरंत काबू में रखे। ट्रंप ने सीधे शब्दों में कहा, अगर वे नहीं रुके, तो हम ईरान पर पहले से कहीं ज्यादा जोरदार हमला करेंगे, जैसा हमने पिछले हफ्ते किया था।
स्विट्जरलैंड में जुटें दिग्गज स्विट्जरलैंड में जारी इस अहम बैठक में अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान मौजूद हैं। बैठक में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी हिस्सा लिया है, जहां शांति बहाली के फॉर्मूले पर चर्चा हो रही है।
जेडी वेंस का रुख: थोड़ा पेचीदा लेकिन उम्मीद है उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस बैठक को इतिहास में पहली बार टीमों के तौर पर साथ बैठने का अवसर बताया। उन्होंने स्वीकार किया कि सीजफायर पर बातचीत पेचीदा है और तकनीकी मतभेद पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि पिछले कुछ घंटों में काफी प्रगति हुई है और अमेरिका ईरान के साथ एक साझा भविष्य की ओर देखना चाहता है।
ईरान पर जिम्मेदारी, ट्रंप का नया दांव वेंस ने ईरान को लंबे समय से चली आ रही क्षेत्रीय अस्थिरता का मुख्य कारण बताया है। इसके बावजूद, उन्होंने यह संकेत दिया कि ट्रंप प्रशासन ईरान के लोगों के साथ संबंधों को बदलने के लिए एक नई शुरुआत का पक्षधर है। ट्रंप द्वारा मध्य पूर्व में कूटनीतिक समाधान खोजने के दावों के बीच, उनकी धमकी ने पूरी दुनिया को असमंजस में डाल दिया है।
क्या पटरी पर आएगी शांति? एक ओर कूटनीतिक मेज पर शांति की बातें हो रही हैं, तो दूसरी तरफ सैन्य चेतावनी का असर बातचीत पर पड़ता दिख रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप की हालिया धमकियां ईरान के कड़े तेवर को और भड़का सकती हैं, जिससे स्विट्जरलैंड में हो रही यह शांति वार्ता एक बार फिर अधर में लटक सकती है।
On Truth Social, US President Donald Trump posts, Iran must immediately stop their highly paid proxies in Lebanon from causing trouble. If they don’t, we’ll hit Iran very hard again, just like we did last week, only harder. pic.twitter.com/Uzyt9fAIqS
— ANI (@ANI) June 21, 2026
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